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केंद्र सरकार ने इस विपणन सत्र 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएससी)पर धान की खरीद की है- बालियान

केंद्र सरकार ने इस विपणन सत्र 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की अधिक खरीद की है- अशोक बालियान

कृषि सुधार के लिए तीन बिलों के कानून बन जाने के समय किसान की धान की फसल तैयार हो गई थी। और उसी समय केंद्र सरकार ने धान क्रय केन्द्रों पर धान की खरीद जल्द चालू कराने की घोषणा कर दी थी। केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2020-21 के लिए धान (कॉमन ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,868 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए वेरायटी के धान का 1888 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया था।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ विपणन सत्र 2020-21 में अब तक एमएसपी पर धान खरीद 20 प्रतिशत बढ़कर लगभग 330 लाख टन हो गई है। वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष में अब तक हुई धान की कुल खरीद 330 लाख टन में से, पंजाब से 202.77 लाख टन खरीद की गई है, जो कि कुल खरीद का 61.47 प्रतिशत हिस्सा है।
पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में अभी तक करीब 20 प्रतिशत ज्यादा धान की खरीद हुई है। खरीफ का विपणन सत्र अक्टूबर से शुरू होता है। इस वर्ष खरीफ 2020-21 के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में हुई है।
इसके अलावा राज्यों से प्रस्ताव के आधार पर खरीफ विपणन सीजन-2020 के लिए तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश से मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत 6 नवंबर, 2020 तक सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग, उड़द, मूंगफली की फली और सोयाबीन की 31,927 मीट्रिक टन की खरीद की है। इस बार दलहन और तिलहन की खरीद में 91.95 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
लेकिन इन सब के बीच किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कुछ राज्य अपने प्रदेश में धान व् अन्य सरकारी खरीद की जाने वाली कृषि उपज की सरकारी खरीद समय से शुरू नहीं करते है और रबी सीजन की फसलों की बुवाई के लिए किसानों को पैसों की जरूरत है, इसलिए वे औने-पौने भाव पर धान बेचने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ राज्यों में सरकारी क्रय केंद्र चालू न होने के कारण किसानों को मंडियों में धान को करीब 1,000 रु से लेकर 1,300 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पड़ा है। इसके लिए केंद्र सरकार को अनिवार्य रूप से समय से और मांग के अनुसार सरकारी क्रय केंद्र खुले, कानून में प्रावधान करना चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा हाल में लागू किए गए कृषि सुधार के लिए बने तीनों कानून किसान को लेकर पंजाब, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के किसान संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। देश में कृषि उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे न बिके यह मांग किसानों की उचित है।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल में लागू किए गए कृषि सुधार के लिए बने तीनों कानून किसान हित में है। यदि कोई व्यापारी, कंपनी, बाजार और संगठन किसान की दहलीज या खेत तक आकर फसल के बेहतर दाम देना चाहता है, तो इसमें गलत क्या है।
इन तीन बिलों में से एक बिल कांट्रैक्ट फार्मिंग में कोई भी विवाद होने पर फैसलें के लिए सुलह बोर्ड में एसडीएम कोर्ट का प्रावधान किया है। किसान के बीच विवाद होने की स्थिति में कोई सिविल कोर्ट का प्रावधान इसलिए नहीं किया क्योकि सिविल कोर्ट में विवाद में स्टाम्प शुल्क लगेगा और समय भी अधिक लगेगा। इस प्रावधान का किसान संगठन विरोध कर रहे है जबकि पंजाब में वर्ष 2013 से राज्य में कांट्रैक्ट फार्मिंग कानून बना हुआ है और उसमे भी विवाद सुलझाने के लिए एसडीएम कोर्ट का प्रावधान है। किसी भी कानून में हमेशा सुधार की आवश्यकता पडती रहती है। इन बिलों को लेकर यदि कोई किसान हित का सुझाव आता है तो उस पर केंद्र सरकार को विचार करना चाहिए।