Home कविता/शायरी “मात्र मानुष का हमें पहचान दो माँ शारदे”

“मात्र मानुष का हमें पहचान दो माँ शारदे”

माँ शारदे
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नित्य विद्या का हमें वरदान दो माँ शारदे,
भाव भाषा का हमें अब ज्ञान दो माँ शारदे।

मात मानस में प्रखर मेधा सुमति भर दीजिये,
सत्य के दुर्गम डगर को भी सुगम कर दीजिये।
चित्त से तम दूर करके,नव प्रभा शोभित करें
मात्र मानुष का हमें पहचान दो माँ शारदे।।

नित्य विद्या का हमें वरदान दो माँ शारदे,
भाव भाषा का हमें अब ज्ञान दो माँ शारदे।।

काटकर मद मात वीणावादिनी तर दीजिये,
मात देकर पर नवल,साहस अचल भर दीजिये।
श्वेतवर्णी माँ उजालों से नवल भारत गढ़ें,
अब हमें नूतन गगन का दान दो माँ शारदे।।

नित्य विद्या का हमें वरदान दो माँ शारदे,
भाव भाषा का हमें अब ज्ञान दो माँ शारदे।।

शावर भकत “भवानी”
कोलकाता
पश्चिम बंगाल