वैश्विक भुखमरी सूचकांक की जारी सूची पर मौजूदा सरकार को आपत्ति |

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हंगर इंडेक्स लिस्ट जारी होते ही विवाद छिड़ गया है। विपक्षी पार्टियां इस मामले पर सरकार को घेर रही हैं, वहीं सरकार ने हंगर इंडेक्स की मैथडोलॉजी और आंकड़ों पर ही सवाल उठा दिए हैं।इस बार की लिस्ट में केवल 15 ऐसे देश हैं, जो भारत से पीछे है।
समझते हैं, ये हंगर इंडेक्स है क्या? इसको कैसे तैयार किया जाता है? साल दर साल भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? और सरकार किस आधार पर इसको खारिज कर रही है?…

ग्लोबल हंगर इंडेक्स क्या होता है?
आसान भाषा में समझें तो ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) बताता है कि किसी भी देश में भुखमरी की स्थिति क्या है। इसे हर साल कंसर्न वर्ल्डवाइड और वर्ल्ड हंगर हेल्प (जर्मनी में Welthungerhilfe) नामक यूरोपीयन NGO तैयार करते हैं। दुनियाभर के अलग-अलग देशों में 4 पैमानों का आंकलन कर इंडेक्स को तैयार किया जाता है।

इसे बनाने का उद्देश्य दुनियाभर से भुखमरी को मिटाने के लिए हो रहे प्रयासों की समीक्षा करना है। इंडेक्स में हर देश की रैंकिंग अलग-अलग पैमानों पर तय करके ये विश्लेषण किया जाता है कि देश में भुखमरी की वजह क्या है और इसको दूर करने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं।

इस इंडेक्स में भारत की स्थिति कैसी है?
116 देशों में से भारत का स्थान 101वां है। भारत उन 31 देशों में भी शामिल है जहां पर भुखमरी की समस्या काफी गंभीर मानी गई है। भारत नेपाल से 24 और पाकिस्तान से 9 पायदान नीचे है। भारत का GHI स्कोर 27.5 है, जो कि गंभीर कैटेगरी में आता है।

GHI स्कोर कैसे कैलकुलेट किया जाता है?
हर देश का GHI स्कोर 3 डायमेंशन के 4 पैमानों पर कैलकुलेट किया जाता है। ये तीन डायमेंशन हैं –

अंडरनरिशमेंट: अंडरनरिशमेंट यानी एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर के लिए जरूरी कैलोरी नहीं मिलना। आबादी के कुल हिस्से में से उस हिस्से को कैलकुलेट किया जाता है जिन्हें दिनभर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल रही है।

चाइल्ड मोर्टालिटी: चाइल्ड मोर्टालिटी का मतलब हर 1 हजार जन्म पर ऐसे बच्चों की संख्या जिनकी मौत जन्म के 5 साल की उम्र के भीतर ही हो गई।
चाइल्ड वेस्टिंग: चाइल्ड वेस्टिंग यानी बच्चे का अपनी उम्र के हिसाब से बहुत दुबला या कमजोर होना। 5 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चे, जिनका वजन उनके कद के हिसाब से कम होता है। ये दर्शाता है कि उन बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिला इस वजह से वे कमजोर हो गए।

चाइल्ड स्टंटिंग: चाइल्ड स्टंटिंग का मतलब ऐसे बच्चे जिनका कद उनकी उम्र के लिहाज से कम हो। यानी उम्र के हिसाब से बच्चे की हाइट न बढ़ी हो। हाइट का सीधा-सीधा संबंध पोषण से है। जिस समाज में लंबे समय तक बच्चों में पोषण कम होता है वहां बच्चों में स्टंटिंग की परेशानी होती है।

इन तीनों आयामों को 100 पाइंट का स्टैंडर्ड स्कोर दिया जाता है। इस स्कोर में अंडरनरिशमेंट, चाइल्ड मोर्टलिटी और चाइल्ड अंडरन्यूट्रिशन तीनों का एक-एक तिहाई हिस्सा होता है। स्कोर स्केल पर 0 सबसे अच्छा स्कोर होता है, वहीं 100 सबसे बुरा।
महिला और बाल विकास मंत्रालय ने हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति पर कहा है कि रिपोर्ट जमीनी वास्तविकता और तथ्यों से परे है। साथ ही मंत्रालय ने ये भी कहा कि इंडेक्स को बनाने के लिए जिस मैथड को अपनाया गया है वो अनसाइंटिफिक है।

मंत्रालय ने अपने बयान में फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइजेशन (FAO) की ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2021’ पर भी सवाल उठाए हैं। हंगर इंडेक्स में अंडरनरिश्मेंट का डेटा FAO की इसी रिपोर्ट से लिया गया
इंडेक्स को बनाने के लिए अंडरनरिशमेंट का डेटा फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइजेशन (FAO) से लिया गया है। ये संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जो दुनियाभर से भुखमरी को खत्म करने और पोषण और खाद्य सुरक्षा में सुधार के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ावा देती है।

ये एंजेसी हर साल ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड’ नाम से एक रिपोर्ट जारी करती है। 2018- 20 के आंकड़े बताते हैं कि भारत की 15.3% आबादी अंडरनरिश्ड है। इसी आंकड़े को हंगर इंडेक्स का कैलकुलेशन करते वक्त भी इस्तेमाल किया गया है।

हंगर इंडेक्स में भी भारत में अंडर नरिश्ड पॉपुलेशन की संख्या 15.3% बताई गई है। साथ ही चाइल्ड वेस्टिंग की रेट 17.3% है। ये दोनों ही पैमाने हैं जिनकी वजह से भारत का प्रदर्शन खराब हुआ है। बाकी दो पैमाने – चाइल्ड स्टंटिंग और मोर्टलिटी रेट में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। पैमानों के लिए सभी आंकड़े WHO, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों, वर्ल्ड बैंक और अलग-अलग सर्वे से लिए गए हैं।

क्या आंकड़ों पर सवाल उठाना सही है?
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया के मुताबिक, कोई भी मैथडोलॉडी पूरी तरह परफेक्ट नहीं होती है, लेकिन जिस आधार पर हंगर इंडेक्स को तैयार किया गया है, ये बहुत स्टैंडर्ड और वैलिड मैथडोलॉजी है। साथ ही सभी देशों के लिए एक ही मैथडोलॉजी के आधार पर रैंकिंग तैयार की गई है। इसलिए अगर मैथडोलॉजी में कहीं कोई समस्या है, तो वो सभी देशों पर लागू होती है।

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