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नई कृषि नीति से होगा किसानों को लाभ-रजनीश राय

राजसत्ता पोस्ट

नई कृषि नीति से होगा किसानों को लाभ-रजनीश राय

15 जनवरी

रजनीश राय
राष्ट्रीय प्रवक्ता
भाजपा किसान मोर्चा

लखनऊ-राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा: सत्ता के व्यक्ति केंद्रीत होने का अगर नुकसान होता है तो निश्चित रूप से एक ख़ास वर्ग, ख़ास प्रदेश तथा आर्थिक रूप से सक्षम समूहों द्वारा प्रायोजित आंदोलन और विरोध का तथा उसके बाद ज्यादातर मामलों में देश के सर्वोच्च न्यायालय के अनावश्यक हस्तक्षेप का कई गुना ज्यादा नुकसान आने वाले समय मे इस देश का होगा ये सुनिश्चित है।
नई कृषि नीति से ज्यादा किसानों के आर्थिक समूहों द्वारा प्रायोजित आंदोलन को लेकर सभी वर्गों में…. खास तौर पर देश के हर कोने से, हर स्तर के किसानों में बहुत बड़ा मतभेद है। एक वर्ग समर्थन में तो दूसरा इसके विरोध में अपनी प्रतिक्रिया और अपील कर रहा है जिसकी मुख्य वजह किसान नीति के स्तर पर समझ और स्पष्टीकरण के साथ- साथ जागरूकता का अभाव है तो वहीं कुछ हद तक मीडिया तथा गैर भाजपा दलों द्वारा पैदा किया गया भ्रम भी है…. लेकिन मेरा मानना है कि इस पूरे प्रकरण में एक मात्र और जो सबसे बड़ी समस्या है वो किसी भी तरह के कानूनों के बनाते समय की मूल धारणा को क्रियान्वयन के समय व्यक्ति और व्यवस्था द्वारा दूषित भाव से लागू करना …. क्योंकि वर्तमान सरकार हो या पूर्ववर्ती सरकारें रही हों कानून बनाते समय एक वर्तमान की जितनी चुनौतियां सामान्यतया दिख पाती हैं या उस व्यवस्था को निकट भविष्य में प्रभावित कर सकती हैं अच्छे और बुरे दोनो रूपों में उसको ध्यान में रखकर ही योजना बनाई जाती है लेकिन बीते 70 सालों में सबसे बड़ी चूक…. लगभग सभी सरकारों से उसके क्रियान्वयन के स्तर पर सक्षम और संबंधित लोगों की उन योजनाओं या कानूनों की मूल धारणा से लागू करवाने के प्रति जवाबदेही और दण्ड विधान के व्यवहारिक रूप से लागू नही करवा पाने को लेकर हुई है।
और जब तक किसी योजना के क्रियान्वयन के लिए संबंधित लोगों के प्रति जवाबदेही और दंडविधान सार्वजनिक रूप से प्रभावित नही करेगा तब तक कोई कानून इस देश के किसी भी व्यक्ति की सोच, किसी पार्टी की विचार धारा या किसी भी दूरदर्शी योजना को लागू नही होने देगा और न ही उस वर्ग विशेष के जीवन स्तर को सुधरने देगा।

क्योंकि जितना समृद्ध कानून इस देश का बना या जितनी भी बार उसमे संसोधन किया गया शायद ही किसी देश का हुआ होगा और लगभग हर कानून के प्रतिपालन के साथ परिस्थितियों को भी रेखांकित किया गया लेकिन नीति निर्धारण करते समय नियत निर्धारण करने और उसके लिए दण्ड का समुचित प्रबन्ध शायद नही हो पाया जिससे की नीति के साथ- साथ नियत को उसी मानक पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके जिस भावना से उसका निर्माण किया गया था। अगर बात हम लोग किसान नीति को केंद्रित करके भी करें तो भी जो पहले से बना कानून था वो वर्तमान में निष्प्रभावी क्यों हो रहा है या नए कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी तो उसकी भी जद में यही बात सामने आएगी
कुल मिलाकर कहा जाए तो बीते लम्बे वक़्त से ब्यूरोक्रेसी ने पूरे सिस्टम को हिप्नोटाइज करके रखा है या फिर ऑक्यूपाइड …
और जब तक इन लोगों के चंगुल से इस सिस्टम को बाहर नही निकाला जाएगा तब तक किसी भी तरह के बदले हुए कानून हों या पुराने कानून सभी आवश्यकता या विशेष आवश्यक परिस्थितियों में प्रभावहीन होते रहेंगे।
उसके व्यवहारिक रूप को समझने का सबसे अच्छा और तात्कालिक उदाहरण कोविड के दौरान व्यवस्था संचालन और नियंत्रण के लिए दिए गए अधिकारों के दुरुपयोग से लगाया जा सकता है जिसकी मूल धारणा लोगों को जागरूक करते हुए स्वनियंत्रित होकर वर्तमान समस्या से बचना था लेकिन सभी स्तरों पर इसको एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया गया।
अतः सरकार से अनुरोध है की जितने भी अनुसांगिक संगठन और उनसे जुड़े कार्यकर्ता हैं उन सभी को चुनिंदा विशेषज्ञ लोगो द्वारा स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण देकर जागरूक करते हुए उस वर्ग विशेष के बीच स्थापित अगर किया जाए और ब्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर योजना की असफलता पर कार्यवाही सुनिश्चित कर दी जाए तो किसी हद तक किसी भी योजना या प्रावधानों को लागू करने में सफलता मिल सकेगी अन्यथा किसी भी स्तर से किसी की भी बेहतरी के लिए आने वाला हर बिल कभी कुछ वास्तविक जरूरी संसोधनों के अभाव में या तो लागू हो जाएगा या फिर कोई बेहतर बिल अराजक आंदोलन की भेंट चढ़ जाएगा………फिर भी सुप्रीमकोर्ट और सरकार के अंतर्विरोध के बावजूद मोदी जी वर्तमान किसान नीति को यथावत लागू करा ले जाएंगे और एक बेहतर आय श्रोत के सभी जरूरी प्रावधानों के साथ इसका लाभ पूरे देश के किसान जरूर ले पाएंगे।
रजनीश राय
राष्ट्रीय प्रवक्ता
भाजपा किसान मोर्चा