मेरी लड़ाई डॉक्टरों से नहीं, ड्रग माफिया से है: बाबा रामदेव
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नई दिल्ली। एलोपैथी को लेकर दिए बयान के बाद बाबा रामदेव को माफी मांगनी पड़ी थी और बयान भी वापस लेना पड़ा था. हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और बाबा रामदेव अब तक आमने सामने हैं. 


बयान के बाद हुए विवादों पर बाबा रामदेव ने कहा, "मैं न तो एलोपैथी के खिलाफ हूं, न डॉक्टर्स के खिलाफ हूं और आईएमए के खिलाफ होने का कोई प्रश्न नहीं है. ठीक है, उन्हें अपनी राजनीति चलानी है, डॉक्टरों के बीच में अपनी नेतागिरी करनी है तो उसके साथ में लड़ाई का कोई प्रश्न नहीं है."

बाबा राम देव ने कहा, "असली लड़ाई ड्रग माफिया के खिलाफ है, जो दो रुपये की दवा को 2000 रुपये में और कभी कभी तो 10-10 हज़ार में बेचते हैं. गैर ज़रूरी ऑपरेशन करते हैं, गैर ज़रूरी टेस्ट करते हैं. ये मैं नहीं कहता डॉक्टर त्रेहन भी कहते हैं. और कई बार ओवरडेज़ देकर क्या क्या हो रहा है. आपने डॉक्टर गुलेरिया (एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया) जी को भी सुना है. पूरी दुनिया में लाखों करोड़ों लोगों की मौत होती है."

उन्होंने कहा कि मैं किसी विवाद को नहीं बढ़ाना चाहता, मैं विवाद को खत्म करना चाहता हूं. बाबा रामदेव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "मैंने कहा है कि मॉडर्न मेडिकल साइंस ने जो प्रगति की है, एडवांस सर्जरी में, लाइफ सेविंग ड्रग्स में. इन दो चीज़ों में मॉडर्न मेडिकल साइंस का बहुत सम्मान करता हूं. लेकिन उन्होंने अगर लाइफ सेविंग ड्रग्स दिए हैं , एडवांस सर्जरी की है. ये जो मामला है बहुत बड़ा है. लेकिन 98 फीसदी फिर चाहे, बीपी है, शुगर है, थाइराइड है, अर्थराइटिस है, फैटी लीवर है, ऐसी तमाम बीमारियों का इलाज हम योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी से कर सकते हैं."बाबा रामदेव ने कहा वो बयान मेरा अपना बयान नहीं था. मैं वाट्स एप मैसेज पढ़ रहा था. मैंने उस दौरान भी कहा कि मैं एलोपैथी का सम्मान करता हूं.

वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाने के आईएमए के आरोपों वाले सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि मैंने तो कहा है कि वैक्सीन की डबल डोज़ लो और साथ में योग आयुर्वेद की भी डबल डोज़ लो. उन्होंने कहा कि ये मुझे देशद्रोही कहते हैं. मैं विवाद नहीं बढ़ाना चाहता. किस प्रकार से इन आईएमए वालों ने देश के खिलाफ बयान दिए हैं, देश के संविधान के खिलाफ बयान दिए हुए हैं, देश के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ बयान दिए हैं, भारतीय संस्कृति के खिलाफ बयान दिए हुए हैं. इनका कच्चा चिट्ठा देखो. आईएमए को मैं गंभीरता स लेता ही नहीं.

'किसी के बाप में हिम्मत नही' वाले बयान पर रामदेव ने कहा कि उसमें से सिर्फ एक वाक्य को ले लिया गया है. मैंने उसमें कहा कि मैं देश के संविधान को, कानून को मानता हूं. मैंने कोई गलत काम नहीं किया है. तो मुझे कौन गिरफ्तार करेगा. किसमें हिम्मत है. उन्होंने कहा कि मैंने ये बात हंसते हंसते कहा और हंसी को इतना सीरियस ले लिया और यहा मुझपर एक हज़ार करोड़ का मानहानि का मुकदमा कर दिया. जिनका कोई मान नहीं, उनकी हानि कौन करेगा.

वैक्सीन लगवाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं वैक्सीन का समर्थक हूं. पहले बच्चों और बुजर्गों को वैक्सीन लगने दीजिए. उन्होंने कहा, "स्वामी रामदेव इतना हट्टा कट्टा है, मेरा हार्ट ठीक, मेरा बीपी ठीक, मेरी किडनी ठीक, मेरा लीवर ठीक, मेरी इम्यूनिटी इतनी ठीक है कि मेरी 25 साल की बायोलोजिकल उम्र है. पहले कमज़ोर लोगों का वैक्सीनेशन होने दें. मैंने अपना नाम अंतिम सूची में लिखवाया हुआ है और मैं वैक्सीनेशन का समर्थक हूं."

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