राहुल गांधी करेंगे मेगा शो, कांग्रेस को 1 लाख की भीड़ की उम्मीद, ऐसे डायवर्ट होगा ट्रैफिक

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के 2022 के चुनाव को कांग्रेस खींचतान की भेंट चढ़ने देना नहीं चाहती। पार्टी के शीर्ष नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की गुरुवार को होने जा रही रैली के माध्यम से क्षत्रपों की एकजुटता का संदेश भी दिया जाएगा। अलबत्ता, भीड़ जुटाकर तमाम बड़े नेता प्रदेश की अंदरूनी राजनीति में खम ठोकते नजर आ सकते हैं।

कांग्रेस को भाजपा को पिछले चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत से तो निपटने है ही, साथ में गुटीय खींचतान को साधने की बड़ी चुनौती भी है। पार्टी के भीतर दिग्गजों में खींचतान रह-रह सामने आ जाती है। चुनावी साल में प्रदेश संगठन में किए गए बदलाव में गुटबाजी सामने आ चुकी है। असंतोष को थामने की कवायद के लिए ही चार कार्यकारी अध्यक्षों की तैनाती भी करनी पड़ी। अगला विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए करो या मरो सरीखा है। पार्टी हाईकमान सबको साथ लेकर चलने की नसीहत दे चुका है। यह पार्टी हाईकमान का ही दबाव है कि अगले विधानसभा चुनाव के लिए किसी चेहरे को आगे नहीं किया गया।

दरअसल पार्टी की इस रणनीति के पीछे सबको साथ लेकर और साधने की रणनीति रही है। चार कार्यकारी अध्यक्षों की तैनाती से लेकर प्रदेश में परिवर्तन यात्रा की रणनीति और कांग्रेस छोड़कर जाने वाली की फिर वापसी के मामले में हाईकमान सधे अंदाज में फैसला लेता रहा है। क्षत्रपों की आपसी लड़ाई में विधानसभा चुनाव का महासमर उलझकर न रह जाए, इसके लिए विभिन्न राज्यों से पर्यवेक्षकों की लंबी-चौड़ी टीम उतारी गई है। सावधानी बरतने की इसी कड़ी में चुनाव से पहले प्रदेश में पार्टी क्षत्रपों को भी साधा जा रहा है। राहुल गांधी की रैली में एकजुटता का यही संदेश देने की कोशिश भी की जा रही है, ताकि जनता के बीच अच्छा संदेश जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान की बागडोर संभाल रहे हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के साथ ही जिलों में भी जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में समन्वय मजबूत करने का काम प्रदेश प्रभारी और केंद्रीय टीम ने अपने हाथों में लिया है। रैली की तैयारी, भीड़ जुटाने की कार्ययोजना और कार्यकर्त्ताओं का मनोबल बढ़ाने में सभी नेताओं की जिम्मेदारी तय करने के पीछे एका की यही मंशा काम कर रही है। इसी संदेश के बूते बूथ स्तर पर कार्यकर्त्ताओं का मनोबल बढ़ाने की तैयारी भी है, ताकि भाजपा को हर स्तर पर चुनौती दी जा सके।

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