विवाहीत महिलाएं सोशल पर ढुँढने आती हैं खुद को

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जो खो सी गई हैं घर की जिम्मेदारियों मैं ,
वो यहाँ प्यार के चक्करों मैं नही पढना चाहती ,
वो ढुँढती है , बस एक दोस्त , जिसके लिए वो खास हो ,

और उसके लिए वो खास हो ,
कर सके जिससे वो अपने मन की , जो कह नही पाती किसी को ,
जो दबी हैं उसके अंर्तमन मैं कहीं बहोत गहरी ,
वो खोलना चाहती हैं खुद को परत दर परत ,
जहाँ छुपी हैं एक नाजुक सी बच्ची बहोत गहरी ,
कोई हो जो उसे एहसास करा सके की वो आज भी सुंदर हैं और उसका मन निर्मल नदी सा पाक हैं ,
ये महिलाएं use nd throw नही होती , ये स्वाभिमान से भरी ,
अनुभव से भरी , बेजोड़ शख्सियत की मालकिन होती हैं ……

पुरुष इनको कमजोर और असाहय समझने की गल्ती ना करे

ये महिलाएं आत्म विश्वास से भरी मजबूत होती हैं…..

✍️पीयूष मेहता

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