Home कविता/शायरी मैं वो आदमी हूं….

मैं वो आदमी हूं….

मैं आम आदमी हूं,
किसी जगह नौकरी कर के टैक्स देने वाला आम आदमी नहीं,
वह आम आदमी जिसे पता ही नहीं कि वह टैक्स देता भी है या नहीं।

मैं वो आम आदमी हूं जिसे शायद टैक्स का मतलब भी नहीं पता,
पता है तो बस अपने फावड़े की धार और अपने खेतों का हाल।

मैं वो हूं जिसे पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से कोई लेना देना नहीं,
मेरी रातें तो महाजन से लिए उधार लौटाने की चिंता में कटती हैं।

मैं वो हूं जो रोज सुबह काम की तलाश में घर से निकलता है,
और शाम को लौटते वक्त अपने भाग्य को कोसता है।

मैं वो हूं जो दिन भर मालिक के खेतों में बेगारी खटता है,
और कभी सेर भर कुछ मिल जाए तो ईश्वर को धन्यवाद दिए नहीं थकता है।

मैं वो हूं जिसे धर्म मज़हब जात से कोई मतलब नहीं,
मैं गरीब ही जागता हूं और फिर गरीबी की हालत में ही सो जाता हूं।

मैं वो आम आदमी भी नहीं जिसे बारिश सड़क के गड्ढों और कीचड़ की याद दिलाती है,
मैं वो हूं जो घनघोर बारिश देख ललचाए मन से धान रोपने चल पड़ता है,
और फिर खेतों में ही बिजली की चपेट में जल पड़ता है।

मैं वो आम आदमी भी नहीं जिसकी समस्याओं की सुनवाई के लिए पूरा देश लड़ता है,
मैं वो हूं जिसे शायद खुद भी नहीं पता कि मैं भी हूं।

 

कवियत्री: स्नेहांजलि सिंह