दादा के नाम पर लोगों को रिझाते दिखे जयंत चौधरी, 20 मिनट में 30 बार लिया नाम, याद दिलाईं नीतियां

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अलीगढ़। इगलास की माटी और यहां तासीर को रालोद प्रमुख चौधरी जयंत चौधरी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। गुरुवार को रालोद-सपा रैली में मानों वो अपने घर आए हों, इसलिए उन्होंने कहा भी कि चुनाव जिताओ तभी यहां की चमचम खाएंगे। अपने भाषण में भी खांटी देसी अंदाज में नजर आएं। जाटलैंड में अपने दादा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तमाम बातों का जिक्र कर दिलों के डोर को जोड़ने की भी कोशिश की, जिससे रैली में उनका रंग चढ़ सके।

चौधरी जयंत सिंह भी एक मझे खिलाड़ी की तरह सियासी पिच पर भाजपा की केंद्र और प्रदेश की सरकारों को घेरा। उमड़े जनसमूह से सवालिया संवाद किया, बोले, गृहमंत्री अमित शाह ने किसान दिवस पर ही चौधरी चरण सिंह के नाम से कल्याणकारी योजना संचालित करने का एलान किया था, मगर ऐसा नहीं किया। दादा चौ. चरण सिंह के अतीत को याद दिलाया, इशारा उन्हीं के अंदाज में किया। अजगर (गठजोड़) यानि अहीर, जाट, गुर्जर मगर राजपूत की जगह मुसलमानों को जोड़ा। जयंत का साफ इशारा था कि बड़े चौधरी (चौ. चरण सिंह) के सूत्र को हमें अपनाना है और रालोद-सपा के गठजोड़ को मजबूत करें। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व रालोद के मुखिया जयंत चौधरी को लेकर युवाओं में गजब का जोश था। जयंत ने करीब 20 मिनट के संबोधन में दिलों के तार जोड़ने की पूरी कोशिश की। सपा-रालोद के कार्यकर्ता जोशीले अंदाज में नारेबाजी करते रहे। जमकर उत्साहवर्धन भी किया। विधानसभा चुनाव में एकजुट रहने का वादा किया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम शेरवानी ने जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मंच से न आने की घोषणा की तो मंचासीन नेता संशय में थे। उन्हें डर था कि कहीं सपा के कार्यकर्ता रैली के बीच से उठ कर जाने न लगे, मगर सैलाब में अथाह उत्साह था। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने भी अखिलेश के न आने की जानकारी दी। फिर भीड़ सपाईयों के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। उत्साह में जयंत चौधरी के नारे लगाते रहे। सुबह 10 बजे से कार्यकर्ताओं का रैली स्थल पर आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मगर, अखिलेश के न आने पर चेहरों पर खास मायूसी नहीं दिखी। हाथों में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के पोस्टर लहराते रहे।

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