बेहतर यही होगा

खबरे सुने

सुनो बेहतर यही होगा
यू मेरा नाम सफ़हो पर
किताबों में दरख्तों पर
तुम लिखना छोड़ दो जानम
जहाँ से भी गुज़रती हूँ
मैं खुद का नाम पढ़ती हूँ
ये दुनियाँ कुछ नहीं कहती
मगर सबकुछ समझती है
तुम्हारी आँख के रौशन
सबब का हाल पढ़ती है
ज़रा आंखों को तुम रोको
इन हाथों को ज़रा टोको
ये चेहरे पे क्यों मानूसी
ज़रा दिल को भी तो रोको
ये ज़ोरों से धड़कता है
तुम्हारा हाल कहता है
मुझे सब घूरते हैं अब
जो तेरा नाम उठता है
मेरे चेहरे को पढ़ती है
मेरी आँखों को तकती है
ये दुनियाँ रोज़ ही मुझको
बड़ी नफरत से तकती है
सुनो बेहतर यही होगा
मुझे सबसे छुपा लो तुम
या मुझको भूल जाओ
दूर मुझसे हो ही जाओ तुम
सुनो बेहतर यही होगा
सुनो बेहतर यही होगा

✒️सिम्मी हसन

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