Home कविता/शायरी शिक्षित होने में ही है हम महिलाओं की समस्याओं का समाधान

शिक्षित होने में ही है हम महिलाओं की समस्याओं का समाधान

देश की कितनी महिलाएं शिक्षित हैं, स्कूल गई हैं, कालेज गई हैं या अब भी निरक्षर हैं, का कोई भी आंकड़ा रखे बगैर मेरा सीधा संदेश यही है कि हम महिलाओं की सभी समस्याओं का समाधान और सवालों का जवाब शिक्षित होने में ही है. शिक्षित होना हमारी जिम्मेदारी है. अधिकार है. यह हमें समझना होगा. जानना होगा. अपने लिए, परिवार के लिए, बच्चों के लिए, अस्तित्व के लिए, समाज के लिए, देश के लिए. यह अच्छी बात है कि बन रहे नए भारत की आधी आबादी स्वयं के शिक्षित होने की जिम्मेदारी को समझ आगे बढ़ रही हैं।

हमारे शिक्षित होने में हमारी आवाज है. आत्मविश्वास है. आंदोलन है. हमारा शिक्षित होना हमें हमारे अंधेरों की ओर ले जाता है. उस दुनिया की ओर भी ले जाता है जो हमारी दुनिया है, जिसे हमें देखना है. जीना है. बताना है कि हम यह हैं. हमारी किसी से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं. समानता के हम हामी हैं. हमें हमारी जगह चाहिए.

हम महिलाएं इस बात को जान लें कि कोई भी हमें यह न तो बताएगा न यह कहेगा कि आपके लिए यह सही है. आपका शिक्षित होना जरूरी क्यों है? या शिक्षा ही वह औजार है जिससे आप हर लड़ाई लड़ सकती हैं. जीत सकती हैं. आगे बढ़ सकती हैं. यह हमें ही जानना होगा. हम जब शिक्षित होंगी, तभी तो जान पाएंगी कि हमें क्या करना है, क्या बनना है, कैसे करना है, कैसे बनना है? हमारी आत्मनिर्भरता हमारे शिक्षित होने में ही है. हमारा शिक्षित होना हमें हमारी हर आजादी से रू-ब-रू कराता है.

कहते हैं एक पढ़ी-लिखी महिला पूरे परिवार को शिक्षित करती है, जिसकी रोशनी पूरे समाज में फैलती है. सही है. पर क्या समाज इसे स्वीकार कर रहा है? आखिर समाज हम महिलाओं की शिक्षा के उजाले में खुद को क्यों नहीं ला रहा? जबकि आज इसी की सबसे अधिक जरूरत है.
सबके साथ और सबके लिए कैसे आगे बढ़ा जाता है यह एक महिला से बेहतर कोई नहीं जानता. कोई भी शिक्षित महिला इसे कितने अच्छे ढंग से करती है, यह बताने की जरूरत नहीं है. ऐसे में हम महिलाओं को यह देखने, जानने और समझने का समय है कि बदल रहे और बन रहे नए भारत में हम महिलाओं की आवाज कहां है? इसके लिए हमें सड़क से संसद तक हम महिलाओं को अपनी आवाज उठानी होगी. महिलाएं, महिलाओं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी समझें. यह देश और दुनिया की आधी आबादी का सवाल है.

जैसे सीखने की कोई उम्र नहीं होती, वैसे ही पढ़ने की भी कोई उम्र नहीं होती. पढ़ेंगे तो जानेंगे. यह जानना ही हम महिलाओं की ताकत है. इस उम्र में पढ़कर क्या कर लेंगे, यह सोचे बिना पढ़िए, जहां जो मिल जाए, घर में पढ़ रही अपनी बच्चियों के पास बैठिए, देखिए वे क्या पढ़ रही हैं, कैसे पढ़ रही हैं? एक बार करके देखिए. कहते हैं ना कि जब हम उठ खड़े होते हैं तो हालात बदलते देर नहीं लगती.

हम शिक्षित होंगी तभी तो जानेंगी सरकार को, प्रधानमंत्री को, मुख्यमंत्री को, सांसद को, विधायक को, मेयर को, अफसर को, सरकार की नीतियों को, कार्यक्रमों को, योजनाओं को, या हमारे लिए कौन क्या कर रहा है, क्या करना चाहिए, क्या हमें यह सब पता है? सच तो यह है कि शिक्षा के अभाव में हम महिलाओं को न अपनी समस्याओं का पता है और न सवालों का. इसीलिए हमारी कोई आवाज ही नहीं है न कहीं कोई सुनवाई है. जिसके चले एक सोच बनी हुई है कि कुछ भी कह दो, कर लो, महिला है, क्या कर लेगी? क्या यह सही है? अगर नहीं तो शिक्षित होइए. इस धरती पर महिला से बड़ा कोई योद्धा नहीं. महिला दिवस का हमारे लिए यही संदेश है. आप सभी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

निधि मुकेश भार्गव