प्रधानमंत्री मोदी और योगी के बीच क्या शीत युद्ध छिड़ गया है ? 
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इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े नेता दिल्ली और लखनऊ के बीच दौड़ लगा रहे है।पहले दत्तात्रेय और सुनील बंसल की मीटिंगे हुई लेकिन बात नही बनी ।योगी जी ने कोरोना काल की बदिन्तज़ामी के लिए अकेले खुद को जिम्मेदार मानने से मना कर दिया योगी जी का अड़ियल रुख देख भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोषी को लखनऊ में डेरा डालना पड़ा उन्होंने पार्टी के दोनों उपमुख्यमंत्री के अलावा कई मंत्रियों विधायकों और सोशल मीडिया की टीम से अलग-अलग बातचीत की मैं 3 दिन से लखनऊ में रहे और इस दौरान लखनऊ से लेकर दिल्ली तक का तापमान बढ़ा रहा।
इस जंग को कुछ इसी तरह की कोल्ड वार माना जा रहा है जैसी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में खानदानी जंग हुई थी ।
उत्तर प्रदेश में इस जंग की शुरुआत वैसे तो तभी हो गई थी जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने खासम खास अधिकारी अरविंद शर्मा को विधान परिषद में नामित करा कर उन्हें उत्तर प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाने का मन बनाया था।
योगी जी नहीं चाहते थे उत्तर प्रदेश में सत्ता का समानांतर केंद्र बने इसलिए उन्होंने अरविंद शर्मा को कोई भाव नहीं दिया ।यह बात दिल्ली दरबार तक लगातार पहुंची, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि देर सबेर योगी जी को मोदी जी का संदेश समझ आ जाएगा
लेकिन योगी जी तो हठ लगाए बैठे उन्हें किसी भी कीमत पर अरविंद शर्मा मंजूर नहीं है।

इसी बीच केशव प्रसाद मौर्य का नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए चला इस चर्चा ने आग में घी का काम किया।
केशव प्रसाद मौर्य भी योगी जी को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। मुख्यमंत्री योगी जी ने केशव प्रसाद मौर्य को उनकी हैसियत मुख्यमंत्री बनने के कुछ घंटे बाद ही बता दी थी ।
हुआ यूं था कि केशव प्रसाद मौर्य जी ने एनेक्सी जिसे पंचम तल भी कहा जाता है पर मुख्यमंत्री के बगल वाले कमरे में अपनी नेम प्लेट लगवा दी।
इस कमरे में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रमुख सचिव अनीता सिंह बैठा करती थी ।
जैसे ही यह बात योगी जी को पता लगे केशव प्रसाद मौर्य की नेम प्लेट उतरवा दी गई।
पिछले 4 साल में उनके पीडब्ल्यूडी मंत्रालय पर तीखी नजर रखी गई।
उनकी हर फाइल को जांच परख कर ही आगे बढ़ने दिया। और कई ठेकों की फाइट सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई। योगी जी के केम्प ने केशव प्रशाद के विरुद्ध आपराधिक मामलों की कुंडली भी खोल दी ।
मसलन योगी जी के खिलाफ एक कैंप केशव प्रसाद मौर्य का बन गया।
केंद्र के नुमाइंदे के तौर पर उत्तर प्रदेश में संगठन का काम देख रहे सुनील बंसल को भी योगी जी की टीम पहले दिन से निशाने पर रखती रही और उनके खिलाफ भी एक सुनियोजित अभियान चलाया गया ।
जिसका नतीजा यह हुआ के सुनील बंसल और मुख्यमंत्री के बीच भी सहज रिश्ता नहीं रहा ।
करोना महामारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंगा किनारे मिले शवो की खबरों ने जिस तरह से संघ और केंद्र सरकार को परेशान किया उससे भी योगी जी से हिसाब किताब लेने का सही मौका उनके विरोधी टीम को लगा।

प्रदेश में योगी जी से अधिकांश विधायक भी नाराज रहने लगे। बरेली के सांसद और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार सहित कई सांसद और विधायकों ने तो इस संबंध में पत्र लिखकर खुले आम शिकायत की कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अफसर और मुख्य मंत्री उनकी नही सुन रहे और करोना काल मे जनता का गुस्सा जन प्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ता जा रहा है ।लेकिन अगर उन सब बातों को भी छोड़ दें तो योगी जी ने जिस तरह से केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष और अरविंद शर्मा को डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाने के प्रस्ताव पर अपना अड़ियल रुख दिखाया उससे दिल्ली और लखनऊ के बीच तलवारे खींच गई।। इसी बीच कई घटनाक्रम हुए ।प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव खुलकर योगी कैम्प में चले गए ।सात बार के विधायक सुरेश खन्ना को दिल्ली दरबार मे बुलाया गया ।पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उनसे घण्टो बातचीत की ।सुरेश कहना 2017 में भी ममुख्यमंत्री की लाइन में थे ।दिल्ली दरबार की निगाहें विकल्प के तौर पर राजनाथ सिंह पर भी है लेकिन बताया जाता है कि उन्होंने लखनऊ जाने से मना कर दिया है ।
अब कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है कि अगर मोदी जी के मन में योगी जी के लिए खटास पैदा हो ही गई तो योगी जी के रहते 2022 का विधानसभा चुनाव का नतीजा क्या होगा ?
और अगर योगी जी को हटा दिया गया और किसी अन्य का मुख्य मंत्री बना कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा गया तो नतीजा क्या होगा?
इसमें कोई ज्यादा दिमाग खफा ने की आवश्यकता नहीं है हालत वही है कि खरबूजा छुरी पर गिरे या छुरी खरबूजे पर गिरे कटना खरबूजे को ही है।
बिल्कुल वही स्थिति है उत्तर प्रदेश में फेरबदल हो या नहीं हो अंततः नुकसान भाजपा का ही होगा।

चर्चाओं के अनुसार ऐसे समय में मोदी जी दो गेम खेल सकते हैं पहला गेम उत्तर प्रदेश के तीन हिस्से कर दिए जाए और योगी जी की ताकत को खत्म कर दिया जाए और दूसरा गेम भाजपा बसपा से गठबंधन कर ले तो दिल्ली दरबार की योगी जी पर निर्भरता बिल्कुल खत्म हो जाएगी।।

✍️राजीव प्रताप सैनी

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