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Womens day special बेटियों को बेटा बनाने के आत्मगौरव के ओछी मानसिकता से बाहर निकलना होगा

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

जिसके कोख से सभ्यता जन्मती है, जिसके कोख से ब्रम्हांड उपजता है, वही सभ्यता आज जन्मदायिनी को शराब और जुआ समझकर बाजार में क़ीमत तय कर देती है,

औरत को ज़ब तक पुरुष बनाने की कवायद होगी, ज़ब तक उन्हें उनके मूल स्वरुप से हटकर बेटा समझने की भूल की जायेगी तब तक औरत बेबस रहेगी, परम सत्ता ने जिस मौलिक स्वरुप में नारी को गढ़ा है उसी स्वरुप में हमें स्वीकारना होगा अन्यथा हर बार इस समाज द्वारा पुरुष बनाने की होड़ में अपने मौलिक अस्तित्व के साथ नारी पीछे छूटती जायेगी और फिर तंग नजरिये से भरा समाज दोयम दर्जा प्रदान करता रहेगा….

बेटियों को बेटा बनाने के आत्मगौरव के ओछी मानसिकता से बाहर निकलना होगा और बेटी को बेटी के रूप में ही उसके अस्तित्व, सह-अस्तित्व, क्षमता, और सामर्थ्य को सोये हुए हनुमान की तरह जगाने की जरूरत है ताकि एक बेटी के अंदर बेटी होने का हीन भाव ना उपज सके और वह खुद से डरकर बेटा बनने की इच्छा ना पाल बैठे, और हाँ बेटियों को बेटों के खिलाफ शक्तिशाली या प्रतियोगी बनाने की जरूरत नहीं है बल्कि बुराई, अपराध और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने और संगठित होने के लिए प्रेरित होने की प्रेरणा देने की जरूरत है ताकि समाज के बुराइयों के खिलाफ नारी मुखरता से समाज का प्रतिनिधित्व कर सकें।

सुरेश राय चुन्नी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय