गन्ने के विलंबित भुगतान पर अब बयाज ज्यादा दूर नहीं बयाज के लिए अब अगली तारीख 27 अक्टूबर..

खबरे सुने

गन्ने के विलंबित भुगतान पर अब बयाज ज्यादा दूर नहीं

बयाज के लिए अब अगली तारीख 27 अक्टूबर..विकास बालियान (कृन)

वीएम सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त..

2014 में सरदार वीएम सिंह की याचिका के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा गन्ना किसानों के विलंबित भुगतान पर बयाज देने का आदेश दिया गया था।

यह बयाज लगभग 2000 करोड का था परंतु तत्कालीन अखिलेश सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में इस बयाज को माफ कर दिया, जिसके बाद सरदार वीएम फिर अदालत में गए और उन्होंने कहा कि सरकार को ब्याज माफ करने का अधिकार नहीं है क्योंकि गन्ना किसान ने बैंक से जो लोन लिया है, बीज-खाद जो उधार लिया है, बिजली का जो बिल समय पर नहीं दिया है उस सभी पर या तो ब्याज दिया है या पेनल्टी उसे वसूली गई है।

ऐसे में किसान को उसकी फसल का जो दाम समय पर नहीं मिला उस पर गन्ना एक्ट के तहत 15 फ़ीसदी बयाज दिया जाए।

2017 में वीएम सिंह की याचिका पर मौजूदा योगी सरकार में गन्ना आयुक्त भूषण रेडी को हाईकोर्ट ने आदेश दिया के गन्ना किसानों का बयाज तत्काल दिलाया जाए।

परंतु बाद में हलफनामे देते हुए और हीला हवाली करते हुए आखिरकार भूषर रेड्डी ने कहा कि चीनी मिल 15 फ़ीसदी बयाज तो नहीं दे सकती कहीं 7 फ़ीसदी ब्याज देंगे कहीं 9 फ़ीसदी बयाज देंगी।

जिसके बाद वी एम सिंह फिर अदालत में गए और उन्होंने भूषर रेड्डी के खिलाफ अवमानना की याचिका लगाई।

इस पर आज हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि भूषर रेडी बताएं कि उन्होंने जो ब्याज की दर कम करने की बात कही है क्या वह सरकार के अनुमोदन के बाद कही है, क्या सरकार से अनुमति ली है।

इस पर वह स्पष्टीकरण दें और कम ब्याज दर क्यों दी जाए इस पर भी स्पष्टीकरण दें।

और सरकार जो भी अनुमति देती है उसके अनुसार किसानों को तत्काल उनका बयाज दिलाया जाए। यह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 अक्टूबर लगाई गई है।

वीएम सिंह ने बताया कि अब तक लगभग 5000 करोड रुपए के करीब गन्ना किसानों का बयाज बन चुका है। उन्होंने कहा कि बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी चीनी मिलों को किसानों को बयाज देना ही पड़ेगा यह किसानों का हक है और सरकार अगर ब्याज माफ करती है तो किसानों के भी तमाम बयाज माफ करें।

Leave A Reply

Your email address will not be published.