भारत ने खोला दुर्लभ Supernova का रहस्य

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नई दिल्ली: नैनीताल स्थित आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में इस दुर्लभ  घटना का रहस्य खोला है। सुपरनोवा 2020 एएनके से जुड़े अध्ययन के अनुसार, यह आकाशीय पिंड अपने शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के जरिए एक अन्य न्यूट्रॉन स्टार की उर्जा ले रहा है। इस विस्तृत अध्ययन प्रारंभिक ब्रह्मांड के रहस्य को जानने में मदद कर सकता है।

सुपरलुमिनस सुपरनोवा नामक इस प्रकार की गणना बहुत दुर्लभ होती है। इसका कारण यह है कि वह आमतौर पर कितने बड़े सितारों से उत्पन्न होते हैं जिनका न्यूनतम भार सूर्य से कम से कम 25 गुना अधिक हो। अब तक ऐसा मात्र 150 सुपरनोवा मिले हैं। शोध का परिणाम प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल रॉयल सोसायटी में प्रकाशित हुआ है।

सुपरनोवा की है घटना पृथ्वी से चार अरब प्रकाश वर्ष दूर घटित हुई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, खरबों वर्ष पूर्व हुई घटना की किरणें अब प्रयोगशाला में दर्ज हुई हैं।

सुपरनोवा दरअसल अंतरिक्ष होने वाले ऊर्जा से भरे विस्फोट हैं, जिनसे भारी मात्रा उर्जा निकलती है।

अध्ययन में शामिल रहे डॉक्टर शशिभूषण पांडे ने बताया कि इस सुपरनोवा को पहली बार जनवरी 2020 में ज्विकी ट्रांजिटएंट एंड फैसिलिटी अमेरिका द्वारा खोजा गया था। इस पर नैनीताल के वैज्ञानिकों ने अध्यन शुरू किया। यह संस्थान विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के तहत आता है। किसी आकाशगंगा में सुपरलुमिनस सुपरनोवा की घटना हजारों साल में एक बार ही होती है।

अंतरिक्ष में किसी सितारे के विस्फोट को सुपरनोवा कहते हैं। इस विस्फोट से तारे का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इसलिए इसे किसी तारे का मृत्यपूर्व अंतिम ठहाका भी कहा जाता है।  यह गामा रे बर्स्ट के बाद मानव द्वारा देखी गई सबसे ज्यादा चमकदार घटना है।

इसमें तारे के विस्फोट से चंद सेकंड के भीतर असीमित ऊर्जा निकलती है जिससे चमक उतपन्न होती है। सुपर ल्यूमिनस सुपरनोवा की चमक इससे भी एक से दस हजार  गुना तक ज्यादा होती है। लेकिन सुपर ल्यूमिनस सुपरनोवा अपनी विशेष प्रकृति के कारण इससे भी एक से दस हजार गुना तक ज्यादा चमक बिखेरता है।

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