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अपना अस्तित्व खो चुकी है मिथिला की ये अनोखी परंपरा, सभा में शास्त्रार्थ के बाद होता था वर चयन

आज के आधुनिक दौर में भी मिथिला अपनी परंपरा व संस्कृति के लिए जाना जाता है। परंतु अनेकों प्रथाएं विलुप्त हो चुकी हैं अथवा विलुप्त होने के कगार पर हैं,उन्हीं में से एक है मधुबनी के पास स्थित गांव “सौराठ” में लगने वाली वैवाहिक सभा ।
इसे सौराठ सभागाछी के नाम से भी जाना जाता है। बैसाख- ज्येष्ठ के महीने में ७-१५ दिनों तक ये सभा आयोजित की जाती थी जिसमें पूरे मिथिलांचल के विद्वान एवं वर के परिवार के लोग वर के साथ तथा वधू के परिवार के लोग आते थे । वधू पक्ष वाले वर को पसंद करते थे व वर पक्ष की सहमति के बाद “पञ्जीकार” से प्रमाणित किया जाता था।इस पूरी प्रक्रिया में पंजीकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी , पञ्जीकार वर- वधु के वंश का पूरा ब्योरा रखने का काम करता था ,वह जांच करता था कि किसी भी तरह का सात पीढी तक वर – वधू के बीच कोई रकत सम्बन्ध ना हो ।


इस प्रथा की शुरुआत १४ वी सताब्दी में हुई थी, इसे स्थापित करने का उद्देश्य समाज में विवाह संबंधी व्याप्त बुराई को दूर करना था ।सभा में तय हुआ वर दहेज नहीं लेता था,वर चयन की प्रक्रिया भी अदभुद थी जिसमे वाद – विवाद तथा शास्त्रार्थ किया जाता था व सबसे योग्य वर का चयन विवाह क लिए होता था । कुछ लोगों का मानना है कि गुरु अपने शिष्यों को बुलाते थे उनसे वाद – विवाद करने बाद उनकी योग्यता के अनुसार कन्या से विवाह होता था।

सौराठ गांव का संबंध गुजरात स्थित सौराष्ट्र से जोड़ा जाता है, यहां पर भी सदियों पुराना भव्य सोमनाथ मंदिर स्थापित है परंतु ये मंदिर सौराष्ट्र जितना बड़ा नहीं है ।
मैंने बहुत से लोगों से सुना है कि सोराठ सभा गाछी में भीड़ बहुत अधिक होने से सारे पेड़ के पत्ते गिर जाते थे, हालांकि मुझे इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है कि ये कहां तक सही है ।
विभिन्न कारणों से सभा गाछी अपना अस्तित्व खो चुकी है। मेरे अनुसार इसका प्रमुख कारण है, यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित होना। वाद-विवाद तो दूर यहां किसी भी महिला का प्रवेश वर्जित था, सब कुछ पुरुष ही तय करते थे ।
अब इस सभा को वर की मंडी कहा जाने लगा है ,इससे इस सभा के प्रति लोगों के मन में अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा है । स्तिथि ऐसी हो गई कि जिस वर का विवाह कहीं नहीं होता था वहीं इस सभा में आता था ।सभा से चयनित वर को हीन दृष्टि से देखा जाने लगा।
आज का पढ़ा-लिखा समाज यहां से विवाह करना पसंद नहीं करता है ,अब ये सौराठ सभा गाछी एक इतिहास बन क रह गई है ।

Note: सभा लगती है लेकिन औपचारिकता के लिए बस,अब यहां से विवाह नहीं होता है।

लेखिका: खुशबू झा