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ऑनलाइन का बढ़ता चलन बाज़ारों के लिए बन सकता है परेशानी का सबब

सपना गुप्ता की कलम से

ऑनलाइन___
जब मार्केट धीरे धीरे ऑनलाइन शिफ्ट हो रहा हो तो दुकानदारों का फ्रस्ट्रेट होना लाजमी है…..
इसके कसूरवार वे खुद ही तो हैं…
भारतीय दुकानदारों की हर दुकान में आप लिखा पाएंगे ” ग्राहक मेरा देवता” लेकिन इन्हें आजतक ग्राहकों से तमीज से बात तक करना नही आया…..
शिष्टाचार की तो बात ही छोड़िए….
ग्राहक और दुकानदार दोनो जानते हैं कि वे जो सामान खरीद रहे उसकी कीमत क्या है इस वजह से कीमत को अपने अपने पाले में खींचने की कोशिश होती है….
ऐसे मे मेरा जो अनुभव रहा है कि सामान बिकता न देखकर बाजार के ज्यादातर दुकानदार बहुत ही बदतमीजी से पेश आते हैं. वे आपको इंस्टिगेट करते हैं कि आप अपनी इंसल्ट होते देख तुरंत सामान खरीद लें…
भारतीय दुकानदरों का रवैया एकदम से सामंती टाइप होता है…..
वे गल्ले पर बैठने के बाद किसी सेठ की तरह पेश आने लगते हैं ऎसे मे ग्राहक का दूर होना लाज़मी है…ऑनलाइन कंपनीज अभी डिलीवरी के लिए दुकानदारों से सीधे संपर्क करते है….
कुछ दिन बाद वे प्रॉफिट ऑप्टिमाइज़ करने के लिए अपने खुद के गोडाउन रख लेंगे….
फिर बाजार सिर्फ पार्किंग के काम आएगे और ये बदतमीज दुकानदार वहां सन्नाटे में बैठेगे, क्योंकि सुधरना इनको है नही…..