चुप हूँ मैं चुप ही मुझको रहने दो

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चाँद तारों की बात रहने दो
तुम बहारों की बात रहने दो
रोटियों से ही पेट भरता है
तुम ये वादों की बात रहने दो
रूह दफ़न हो जो जिस्मों में
जिंदानों की बात रहने दो
रौशन हौसलों से ज़िन्दगी है
तुम चराग़ों की बात रहने दो
मयक़दे बन्द न हुए तुझसे
बात ईमां की तुम तो रहने दो
दो घड़ी में ही क़ैद साँसे है
बात सदियों की यूँही रहने दो
मिलने आऊँ तो गले लगा लेना
जीने मरने की बात रहने दो
ज़हर बोलने से बेहतर है
बात मुख्तसर ही रहने दो
मुझसे अब बयाँ नहीं होता
दर्द को आबलों में रहने दो
मुझको मत छेड़ो अपनी बातों से
चुप हूँ मैं चुप ही मुझको रहने दो

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