Home कविता/शायरी मैं नही मनाऊंगी वेलेन्टाइन-डे

मैं नही मनाऊंगी वेलेन्टाइन-डे

मेरी स्वीकृति नही हैं..
इस वेलेन्टाइन-डे को
अच्छा तुम्हीं बताओ
क्या ये सात दिन
पर्याप्त हैं?
प्रेम करने को,कहने को …
तुम्हें हजारों बार देखकर भी
कभी नही देखा मैंने..
मधुर स्पर्श पाकर
सबकुछ अनछुआ सा हैं…..
मैं विकल हो जाती हूं ,वैसे
जैसे प्रथम दिवस,
पर थी ,तुम्हें देखकर,
सांस सांस तुम्हें महसूस करती हैं….
और तुम मुझी में तो हो
ये कहना ,समझना, समझाना,सिर्फ सात दिन?
अरे ना! बाबा ना,!
मुझसे ये खेल न खेला जायेगा
मैं प्रेम में हूँ सदा के लिए…
मेरा..प्रत्येक क्षण तुम पर आधारित है,
और ये सब जताना नही चाहती हूँ ..परिहास होगा,
मैं बस गुम हूं,
गुम रहुंगी तुम्हीं में,
जीवन भर के लिए…
अब …चुप करो…. ये मत कहना तुम ! समझे
मैं नही मनाऊंगी
सिर्फ सात दिन का वेलेन्टाइन
समझ गये ना ?
ना तो मानुंगी,
ना ही मनाऊंगी!
बस हर दिन मनाऊंगी
तुम्हारे साथ का …
और अनकथ अहसास का…

सपना सोनी
दौसा