मैं हूं हिन्दी वतन की

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सुंदर हूँ मनोरम, मीठी, सरल हूँ
ओजस्वी, अनूठी परिचायक मधुर हूँ
आन-बान और शान तुम्हारी,
मां बहना ओ सखी सहेली सजा लो मुझे
मैं हूँ हिन्दी वतन की बचा लो मुझे

देश की आशा गौरवगाथा हूँ मैं
तपस्वी के जप की माला हूँ मैं
मैं ही हूँ आशा मैं ही अभिलाषा,
क्षितिज में अर्क सी चढ़ा दो मुझे
मैं हूँ हिन्दी वतन की बचा लो मुझे ।।

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

( निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय के सूल’। )
सम्भावना पन्त

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