स्पष्टता कितनी जरूरी ??

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स्पष्टता कितनी जरूरी ??

घर परिवार समाज हो या राजनीति किसी भी वस्तु , सवाल और विचार विमर्श का स्पष्ट होना अनेक सवालों का स्वयं में ही हल होता है फिर क्यों न बात दो लोगों के आपसी बातचीत की हो क्योंकि जब हम किसी भी मुद्दे पर स्पष्ट व स्वस्थ्य बातचीत करते हैं तो इससे दोनों के बीच का संबंध और मजबूत बनता हैं। बातचीत एक दूसरे को समझने का जरिया है, इससे हम अपनी भावनाएं एक-दूसरे से साझा करते हैं। बातचीत करते-करते हम समझ जाते है की एक-दूसरे को क्या पसंद और क्या नहीं। अर्थात विचारधारा सिद्धान्त आदि बहुत कुछ …. परन्तु स्पष्ट व स्वस्थ विमर्श हेतु बेहद जरुरी है की बातचीत सही और स्पष्ट हो, अगर दो लोगों की बातचीत में किसी भी तरह की समस्या हो, तो बेहतर यही होगा की उसे जल्द से जल्द सुलझाया जाए, अक्सर ऐसा होता है की बातचीत के दौरान उभरी नोक-झोंक बड़ी होती है, लेकिन उसे वक्त रहते न सुलझाया गया तो वो काफी बड़ी बन जाती हैं। हमारे समाज में हर प्रकार के लोग हैं, कोई समस्या को सुलझाना चाहता है और कुछ लोग पहल भी नहीं करना चाहते और फिर यहीं से शुरु हो जाता है ‘कम्यूनिकेशन गैप’ या यूं कहें कि अस्पष्ट वार्तालाप। बात सिर्फ वोकल वार्तालाप की ही नहीं है कोई भी चीज यदि हमारे मन मस्तिष्क नजर व नजरिए में आएं तो वह स्पष्ट होनी चाहिए । अस्पष्ट शब्द ही अपने आप में अनेक परेशानियों की वजह बनता है अतः कभी भी किसी से अचानक कोई बात न करें शेयर हम शरपराइज या वाह वाही की भूल कर अनेक बार बहुत कुछ ग़लत कर जाते हैं हर सम्भव कोई भी कार्य सलाह लेकर ही करना बेहतर होता है । सर्वप्रथम समस्या की जड़ तक पहुंचना और कारणों से अवगत होना चाहिए तभी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए आक्रामकता से बचना सदैव हितकारी होता है।
हमें मधुर व उचित आवाज़ में बात करनी चाहिए ताकि विचारों में टकराव पैदा न हो। प्रत्येक रिश्ते में ईमानदारी जरुरी है इसकी गरिमा को बनाए रखना ही रिश्ते को सतत् बनाते हैं। हमारी बातों में बनावटीपन की जगह वैरायटी होनी चाहिए । जिस प्रकार एक अस्पष्ट लाइन एक रेखा को तोड़ या छोड़ सकती है ठीक इसी प्रकार एक अस्पष्ट विचार , वस्तु या सवाल भी उसके समाधान से दूर हट सकता है ।

अतः स्पष्ट होना जरूरी है स्पष्ट बनिए ।
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
सम्भावना पन्त

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