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योग्यताओं की भीड़

अरमानों के परिणाम समय समय पर आते रहते हैं। कुछ खुशी से उछल मिठाई खाते और खिलाते हैं; अधिकांश ठहरकर गम खाते हैं। कुछ बहादुर हार-जीत को जीवन का एक हिस्सा मानकर आगे बढ़ जाते हैं या फिर पुन: प्रयास करते हैं। भीड़ बढ़ रही है; नौकरियाँ कम हो रही है। मरीज बढ़ रहे हैं; उस अनुपात में डॉक्टर कम हो रहे हैं। आबादी बढ़ रही है भूमि कम हो रही है! यथार्थ देखकर अजीब सी बेबसी महसूस होती है जब चंद सीटों पर लाखों बच्चों की प्रतियोगिता में योग्य बच्चों के आसूं बहते हैं। मात्र एक दो नम्बर से वर्षों की मेहनत रुक जाती है। कारण?

शिक्षा व्यवस्था ही ऐसी रही कि सबको वर्षों से सरकार ने यह यकीन दिलाया कि “पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगो कुदोगे बनोगे खराब”… हमारे देश के बच्चों ने इतनी पढ़ाई कर ली है कि आज पढ़े लिखे युवाओं की बाढ़ सी आ गयी है। इस बाढ़ की ऊर्जा को उपयोगी बनाने के लिये हमारी केंद्र राज्य सरकारों को नयी नयी योजनाओं में इनका उपयोग करना होगा। अगर इस पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी को सही दिशा नहीं मिली तो इनमें कुंठा की भावना उत्पन्न हो सकती है।

जड़ में देखा जाये तो सारी समस्या की मुख्य जड़ बढ़ती आबादी है। रोजगार यथास्थिति में हैं मगर उसको हासिल करने की क्षमता प्रत्येक वर्ष तीव्र गति से बढ़ जाती है। दूसरी हमारे देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है मगर क्या फायदा ऐसे संसाधनों का जब उनका सही से उपयोग ही नहीं किया जाये! तीसरी समस्या हमारे देश के नेताओं की स्वार्थ की राजनीति है जिस कारण विपक्ष सत्ताधारी नेताओं का सहयोग करने की वजाय उसकी दोनों हाथों से टांगे खींचता रहता है। चौथी समस्या सत्ताधारी नेताओं द्द्वारा किया जाने वाला भ्रष्टाचार है जिस कारण देश के कई समृद्ध राज्य बीमार हो गये हैं। पांचवीं समस्या शिक्षा का संख्यात्मक रूप से अधिक बढ़ना जबकि गुणात्मक/ कौशल शिक्षा का विकास होना चाहिये था। इस तरह समस्याओं की लम्बी सूची तैयार करना बहुत सरल है मगर हमें समाधान निकालना होगा।

देश के प्रत्येक राज्यों के संसाधनों का अगर हम सही से अनुसंधान करके उपयोगी बनाने हेतु प्रयास करेंगे तो देश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध होने लगेंगे। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी से खेती करने के लिये युवाओं को प्रोत्साहित करना होगा। श्वेत क्रांति,हरित क्रांति पर जोर डालना होगा। इंडियन स्पेस रिसर्ज ऑर्गनाईजेशन में रुचिकर युवाओं को ज्यादा से ज्यादा जगह देनी चाहिये। कोडिंग का जमाना है इसके लिये विशेष शिक्षा की व्यवस्था करना होगा। आजकल डकैती बंदूक से नहीं इंटरनेट से पड़ती है; जिसे हम साईवर अटैक कहते हैं। जिसके लिये तकनीकी में हमें बहुत मजबूत बनना होगा। अधिक से अधिक युवाओं को तकनीकी ज्ञान के लिये प्रेरित करना होगा। हमारे यहाँ योग्य युवाओं की कमी नहीं है बस उन्हें सकारात्मक दिशा देने की आवश्यकता है। जिस पर वर्तमान सरकार ने ध्यान देना शुरू किया है।

अनेक क्षेत्र हैं। पेड़ की अनेक शाखाओं के समान हमारी युवा पीढ़ी को विभिन्न क्षेत्र में उनकी योग्यता के अनुरूप उन्हें व्यस्त रखना होगा। उनकी ऊर्जा को सकारात्मक क्रियाओं में लिप्त रखते हुए देश को सशक्त बनाने का प्रयास हम सबको मिलकर करना होगा।

संगीता कुमारी ( कवयित्री/लेखिका)

नरोरा एटॉमिक पॉवर स्टेशन, टाउनशिन, बुलंदशहर