स्वर्ग सी धरती

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हम जो होते हैं
हम वही होते हैं
क्यों बेवजह आडंबर
का आवरण ओढ़कर
दुनिया को भ्रमित करते हैं…
दुनिया छली नहीं
छली दुनिया को
बनाता है मानव
जिंदगी जीने के लिए
ना जाने कैसे-कैसे ढोंग
रचता है मानव…
जानवरों में सबसे शीर्ष
कहलाता है मानव
क्योंकि बुद्धि की तीव्रता अधिक पाता है मानव
बुद्धि से ज्ञान के द्वार
खोलने की शक्ति
क्या मिली
दुनिया को जीतकर
अमर बनना चाहता है मानव…
अमरता का बीज
एक ईश्वर में छिपा है
जिसने इस सुंदर
सृष्टि को रचा है
हम इस स्वर्ग सी
धरती पर रहते हैं
जिसे हमने ही इसे
अपने कर्मो से
नरक समझा है…

संगीता कुमारी
(कवयित्री/लेखिका)
नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन टाउनशिप बुलंदशहर

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