दोहन

खबरे सुने

मैंने सोचा था एक दिन
पहाड़ों के ऊपर खड़े होकर
देखूँगी बादलों को
अपने क़दमों में
कोहरे की तरह लिपटते हुए
और चिल्लाऊंगी खुशी से
या रोमांच से
पर अब लगता है
जब दोहन की आरी
चीर डालेगी
पहाड़ों के सिर
उसके ऊंचे ऊंचे शिखर
तब मैं कहाँ खड़े होकर
देख पाऊँगी
बादलों को

सिम्मी हसन
बलिया

Leave A Reply

Your email address will not be published.