सिम्मी हसन की शानदार पेशकश

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“अग्नि”

पवित्र अग्नि
निगल जाती है
कितनी कितनी लाशें
फूस के छप्पर
बड़े बड़े मकान
कम दहेज लाई दुल्हनें
सुनहरे बालियों भरे खेत
पर अक्सर
ग़रीब के चूल्हे में
इसका बस नहीं चलता
और ये वोट ले कर जीत
जाने वाले नेताओं की तरह
अक्सर ग़ायब मिलती हैं
कि बस
ये तभी उन पर तरस खाती है
जब उन गरीबों की
भूख से सूखी हुई आँतों को
समाज द्वारा
चंदा करके
इकटठा की गई
लकड़ियों पर न परोस दी जाए

✒️ सिम्मी हसन

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