Home कविता/शायरी कण कण में ईश्वर का राज है

कण कण में ईश्वर का राज है

कण कण में ईश्वर
बसा हुआ है
हे मानव तू सांसारिक जीवन में धसा हुआ है
किताबों की पोथी
पढ़-पढ़ कर भी ज्ञान अधूरा भीतर तेरे है
डिग्री की ऊंचाई बढ़ गई
अकड़ की ग्रंथि नहीं घटी है
मानव पढ़ता है कैमिस्ट्री
ढूंढे उसमें जीवन कि मिस्ट्री
कैसे गोड पार्टिकल बनायें?
पार्टिकल में गोड को ढूंढ
कैसे हम मानव गोड बन जायें?
वेद पुराण में कहा गया है
कण-कण में ईश्वर बसा हुआ है
भग है स्त्री
वान है पुरूष
प्रेम मिलन से जीव रचा गया है
तभी तो जन्मात शिशु को
भगवान का दर्जा दिया गया है
विज्ञान सत्य का निर्माण कर रहा है
अध्यात्म सत्य ‘राम नाम सत्य’ का पाठ
कब का पढ़ा चुका है
विज्ञान ‘सत्य’ से रची विपदा का
‘विज्ञान’ से बने संसाधन द्दारा
बचाव हो रहा है
कण-कण में बसे प्रभु को
विज्ञान ढूंढता उसे गोड पार्टिकल में
भारत महान वेदों के माध्यम से
वर्षों पहले ही दे गया यह ज्ञान
कि ईश्वर बसा है कण-कण में
दिखे उसे ही जिसके ह्र्दय रूपी पटल पर
छिपे ईश्वरीय अंश का हो जाये ज्ञान
रावण की नाभिका में छिपा था उसका जीवन
आज का विज्ञान कहे
सम्भाल कर रखो अपनी नाभि
जिसमें विभिन्न बीमारी के बचने का है कारण
आखिर जीवन में कुछ तो बात होगी
तभी तो लोग बार-बार जन्म लेना पसंद करते हैं
ना जाने कितनी योजनायें भविष्य की बुनते हैं
ये जानते हुए कि अगले पल कि खबर नहीं
शिक्षा से जीवन का भोग है
ज्ञान से सत्य का उपयोग है
विज्ञान से अध्यात्म
अध्यात्म से वैराग्य है
ईश्वर का कण कण में राज है…

संगीता कुमारी ( कवयित्री/लेखिका)

नरोरा एटॉमिक पॉवर स्टेशन, टाउनशिन, बुलंदशहर