Home LyfeStyle उत्‍तराखंड में लुभा रहा होम स्टे सेंटरों में पहाड़ी व्यंजनों का जायका…

उत्‍तराखंड में लुभा रहा होम स्टे सेंटरों में पहाड़ी व्यंजनों का जायका…

देहरादून। देवभूमि में आने वाले पर्यटकों के लिए इन दिनों पहाड़ी व्यंजनों का जायका खूब लुभा रहा है। पर्यटकों की मांग पर होम स्टे सेंटरों में भट्ट के डुबे, झंगोरे की खीर, भांग की चटनी, कंडाली का साग, मंडवे की रोटी खूब पसंद की जा रही है। पहाड़ी व्यजनों की डिमांड बढ़ने के बाद पर्यटन विभाग ने सभी होम स्टे सेंटरों के संचालकों से कहा है कि वह अपने सेंटरों में पहाड़ी व्यंजनों को ही प्राथमिकता दें।

सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस उत्तराखंड पर्यटन का हिस्सा रहे हैं। वर्तमान में हेल्थ एंड वेलनेस में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी महत्वपूर्ण हो गई है। राज्य में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले व्यंजनों की पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए कोविड संक्रमण के समय में कुमांउनी व गढ़वाली व्यंजनों की समृद्ध विरासत को मिलाकर राज्य को ‘हिमालयन इम्युनिटी फूड’ केंद्र में रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

देहरादून जौलीग्रांट हवाइ अड्डे के पास स्थित कैफे डिंडयाली की मालिक साक्षी बहुगुणा रतूड़ी ने बताया कि कैफे में पूरी तरह से गढ़वाली मेन्यु है, जहां कंडाली का साग, काफुली, मीठा भात जैसे व्यंजन पर्यटकों को परोसते हैं।

रुद्रप्रयाग में वन इको रिसोर्ट के मालिक अंशुल भट्ट ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक स्थानीय जड़ी बूटियों से तैयार स्थानीय पेय को मेहमानों के लिए परोसना शुरू कर दिया है। मेन्यू में मंडवे की रोटी, गुलथिया, झंगोरे की खीर को शामिल किया गया है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तराखंड का पहाड़ी व्यंजन स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। सरकार राज्य के पर्यटन क्षेत्र में पाक कला को सामने लाने पर विचार कर रही है। यदि पर्यटन के लिए पहाड़ी व्यंजनों को खोजा जाता है और प्रभावी ढंग से इसे लागू किया जाता है कम समय के अंदर प्रदेश खुद को वैश्विक मानचित्र में पाक केंद्र के रूप में स्थापित कर लेगा।