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मेला

दुकानदार -खरीदार
सब व्यस्त…
बेचने वाले,
बेच रहे हैं
सामान, सुर, हुनर…
खरीदने वाले
परखते हैं, तौलते हैं,
मिलाते हैं बजट
लौट जाते हैं उदास
शायद फिर कभी….
बेचने वाले
आंखों में उम्मीद लिए
हर चेहरा पढ़ने की कोशिश में
अपने सामान
बिक जाने की चाहत में
बेचैन
और फिर
अनमने मन से
लौट आते हैं घर
और रात में सोचते हुए
सो जाते हैं कि
अब अगली बार..

सिम्मी हसन