नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास कटान शुरू जमीन नदी मे विलीन , फसले बर्बाद,

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दोहरीघाट। बीते 24 घण्टे में जलस्तर में 23 सेमी की वृद्धि हुई है। नदी खतरा के निशान के 69.90 मीटर से 25 सेमी ऊपर प्रवाहित हो रही है।घाघरा की पूरी धारा गौरीशंकर घाट के समीप शवदाह स्थल पर टकराने से सुरक्षा में लगाए गए बोल्डरों में दरारे पड़ने लगी है।
घाघरा का जलस्तर जैसे जैसे खतरे के निशान के पार करता जा रहा है तटवर्ती क्षेत्रों में तबाही मचानी शुरू हो गई है । जिससे शवदाह स्थल पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। वहीं नवली गांव के सामने 24 घण्टे में 10 बिस्वा जमीन कट कर नदी विलीन हो गई है। दूसरी तरफ निर्माणाधीन फोरलेन पुल के उत्तरी क्षेत्र में नदी की लहरे सीधे टकरा रही हैं, जिससे एप्रोच मार्ग पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।

नदी के जलस्तर पर नजर डाले तो शुक्रवार को 69.92 मीटर पर था, जो शनिवार को 23 सेमी बढ़कर 70.15 मीटर पर पहुंच गया। नदी इस समय खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 25 सेमी ऊपर बह रही है। नदी औराडाड चिऊटीडाड़ में अब बन्धों के पास से होकर बहने लगी है। जबकि बन्धों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से बाढ़ खण्ड मुस्तैद है। वहीं नदी की धारा सीधे मुक्ति धाम पर टकराने से सिंचाई विभाग के होश उड़े हुए हैं। करोड़ों रूपये की लागत से शवदाह स्थल के दक्षिण तरफ नदी की धारा मोड़ने के लिये कराए गए परकूपाइन व ठोकर निर्माण से कोई फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है। नदी की धारा शवदाह स्थल, भारत माता मन्दिर और गौरीशंकर घाट पर सीधे टकरा रही है। रामजानकी घाट और डोमराज घर के पास एक बार फिर नदी की बैकरोलिंग शुरु हो गयी है। जिससे नगरवासियों में दहशत फैल गयी है। नवली गांव से लेकर रामपुर धनौली रिंग बन्धों की ओर अब नदी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। जिसके किसानों की फसलें अब बाढ़ के पानी में डूबने लगीं है। वहीं बहादुरपुर गांव और पतनई गांव सहित अन्य गांवो में बाढ़ का पानी घुसने से सैकड़ो एकड़ फसल जलमग्न हो गई हंै। जिससे किसानों को भारी क्षति का अंदेशा नजर आ रहा है। रामनगर से लेकर सूरजपुर तक किसानों की लहलहाती फसले बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो रही हैं। इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो जल्द ही अन्य गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो जाएगा। जिससे हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने का डर बना हुआ है। उधर बीबीपुर रिंग बन्धे पर नदी का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
दोहरीघाट। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के खेतों में पकी धान की फसलें डूब रही हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। इस बार किसानों का लग रहा था कि बाढ़ से निजात मिल जाएगी, लेकिन बाढ़ के पानी ने दूसरी बार कहर बरपाना शुरू कर दिया है। किसान अजय यादव, रामधीन चौहान, राकेश कुमार, सुभाष, राममोहन, बृजेश ने बताया कि हर वर्ष सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ के पानी के साथ बह जाती है। फसल के मुआवजा दूर कोई देखने भी नहीं आता है। किसानों का कहना है कि बाढ़ से निजात दिलाने के लिए कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। यही कारण है कि हर साल तटवर्ती क्षेत्र के किसानों को फसलों की क्षति का सामना करना पड़ रहा है।

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