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डॉ. हर्ष वर्धन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना के विरुद्ध लड़ाई के सेनापति

नई दिल्ली । चीन के वुहान प्रांत से विश्व भर में फैले कोविड-19 (कोरोना) वायरस के संक्रमण के कारण देश- दुनिया में चारों ओर हाहाकार मच गया । देश और दुनिया में कई जानी-मानी हस्तियों के साथ करोड़ों लोग कोरोना से संक्रमित हुए और लाखों लोगों की असमय मृत्यु हुई । यह क्रम आज भी अनवरत जारी है । कोरोना के संकट से उबरने के लिए भारत सहित दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना की वैक्सीन और कोविड-19 की सटीक दवा बनाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं । कोरोना की वैश्विक महामारी के कारण पूरा विश्व थम सा गया और इससे जीवन से जुड़ी सभी प्रकार की गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई । इसका असर विश्व की अर्थ व्यवस्था के साथ ही रोजगार, व्यापार, वाणिज्य, उद्योगधंधों, शिक्षा, मनोरंजन, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, खेलकूद आदि लगभग सभी क्षेत्रों पर पड़ा है । कोरोना के कारण आज सारे जहान में हर कोई एक नए प्रकार की जीवन शैली, कार्य, आचरण एवं व्यवहार तथा संस्कारों की एक नई संस्कृति को अपनाने के लिए मजबूर हो गया है ।

सदी की इस भयानक त्रासदी का मुकाबला करने में चीन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में शुमार हमारे देश भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सामूहिक प्रयासों से जबर्दस्त राजनैतिक इच्छा शक्ति का परिचय देकर विश्व के सामने एक बेजोड़ मिसाल रखी है वरना विश्व के कई बड़े पंडित यह अनुमान लगाए बैठे थे कि दुनिया में कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देश भारत ही होगा । कोरोना के विरुद्ध भारत द्वारा अपनाई गई रणनीति के फलस्वरूप उन पंडितों के ये अनुमान गलत साबित हो गए ।

दुनिया भर में भारत ही वह अकेला पहला देश था जिसने विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा कोरोना को वैश्विक आपातकालीन महामारी की स्थिति के रूप में ऐलान करने से ही पूर्व ही अपने देश में कोरोना पर विशेषज्ञ समिति की बैठक आयोजित कर वे सभी एहतियातन अग्रसक्रिय कदम उढ़ाये जोकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरुरी थे । फिर ‘जनता-कर्फ्यू’ का प्रयोग और श्रृंखलाबद्ध चार ‘लॉक डाउन’ के बाद फिर ‘जान भी और जहान भी’ के सिद्धांत पर ‘अनलॉक’ एक से छह लागू कर स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में भागीरथ प्रयास किये गए । इनमें लाखों डॉक्टर, पेरामेडिकल स्टॉफ, अन्य स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस, सेना, मीडिया के साथ-साथ अग्रिम पंक्ति के लाखों कोरोना योद्धाओ के अथक प्रयास शामिल हैं, जिनकी आज सारी दुनिया सराहना कर रही हैं । यह भारत के सामूहिक प्रयासों का ही फल है कि आज हमारा देश कोविड-19 की बेहतर रिकवरी दर और मृत्यु दर को कम रखने वाले विश्व के अग्रणी देशों में से एक हैं।

देश में कोरोना महामारी शुरू होने के समय कोविड की जांच के लिए देश में महाराष्ट्र के पुणे में मात्र एक प्रयोगशाला थी लेकिन कोविड के खिलाफ पूरी कर्मठता से लड़ते हुए आज देश में 2220 प्रयोगशालाएं हो गई है जिनमें अब तक पंद्रह करोड़ से भी ज्यादा जांच हो गई हैं । कोविड काल की शुरूआत में हम पी पी ई किट्स, मास्क और वेंटिलेटर्स के लिए विदेशों पर निर्भर थे लेकिन प्रधानमंत्री के ‘आपदा में अवसर’ के नारे पर चल कर देश इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन गया है । ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ के अंतर्गत आज देश में प्रतिदिन लाखों उपकरणों का निर्माण किया जा रहा हैं और हम निर्यात करने की स्थिति में हैI कोरोना काल की अभूतपूर्व परिस्थितियों में चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और कोरोना पीड़ितों के प्रति दुर्व्यवहार और प्रताड़ना की घटनाओं को रोकने लिए भारत सरकार ने संसद में 123 वर्ष पुराने कानून को बदल कर ‘महामारी रोग विधेयक -2020’ पारित कराया है । इसमें दोषी लोगों के लिए गैर जमानती अपराध और अर्थदंड के साथ सात वर्षों तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है ।

डॉ. हर्ष वर्धन प्रमुख सेनापति के रूप में उभरे

कोरोना के विरुद्ध भारत की इस लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेना के प्रमुख सेनापति के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन का नाम सबसे ऊपर लिया जा सकता है जिन्होंने पिछले ग्यारह महीनों में न दिन देखा और न रात तथा कोरोना की मार को कम करने के प्रयास में चौबीसों घंटों अनवरत काम में जुटे रहेI। यहाँ तक कि इस दौरान अपनी मां का असामायिक निधन हो जाने की पीड़ा को भी भूल कर उन्होंने अपने कर्तव्य पालन को सर्वोपरि रखा I वे अपने स्वभाव के अनुरूप बिना कोई दिखावा किए हमेशा पृष्ठभूमि में रहते है और अपनी सरकार की मंशा के अनुसार कार्य निष्पादन ही उनका लक्ष्य रहता है ।

देश के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में कोविड-19 वर्तमान संकट में उनकी इसी सक्रियता के कारण भारत को महामारी के प्रसार को न्यूनतम रखने में मदद मिली है। घनी आबादी वाले हमारे देश में कोरोना महामारी का मुकाबला करने में उनके इस अनुकरणीय कार्य की देश- विदेश में सराहना हुई है । इसी क्रम में उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों और विश्व के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक कर उनका भी मार्ग दर्शन किया I इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा डॉ. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में गठित मंत्री समूह की अब तक 21 बैठकें हुई है जिनमें समय-समय पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड की वर्तमान स्थिति, उनकी आवश्यकताओं और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श होता रहा है। इसके साथ ही उन्होंने इन राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों, सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से वर्चुअल बैठकों के माध्यम से समय-समय पर कोविड के हालातों की समीक्षा कर उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश दिए I

डॉ. हर्ष वर्धन ने कोरोना काल में थेलेसिमिया और अन्य गंभीर रोगियों के लिए रक्त की निर्बाध आपूर्ति के लिए रेडक्रॉस और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाए गए और रक्तदाताओं के लिए निशुल्क परिवहन की व्यवस्था भी करवाई I

दिल्ली में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलो पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला तो डॉ. हर्ष वर्धन भी उनके साथ रहे और उनके दिशा-निर्देशों में किए कार्यों की बदौलत दिल्ली को कोविड के संक्रमण से राहत मिली I कोविड काल के दौरान डॉ. हर्ष वर्धन ने दिल्ली और इसके आसपास कोविड अस्पतालों का दौरा कर स्वास्थ्यकर्मियों और कोरोना योद्धाओं का हौसला बढ़ाया और चिकित्सा प्रबंधों का जायजा लेकर उचित मार्ग दर्शन किया I साथ ही कोविड रोगियों के स्वास्थ्य के हालचाल पूछे । उन्होंने एम्स, दिल्ली में टेली मेडिशन की शुरुआत भी करवाई जिसकी वजह से देश भर के चिकित्सकों और रोगियों को विशेषज्ञ डाक्टरों से टेली परामर्श का लाम मिला ।

इससे पहले भी वे अपने सार्वजनिक जीवन में पोलियो को मिटाने के लिए भारत के चेहरे रहे हैी उन्होंने दिल्ली में पोलियो उन्मूलन की शुरुआत करने के बाद देशव्यापी अभियान के माध्यम से न केवल भारत वरन सम्पूर्ण दक्षिणी एशिया से पोलियों को जड़ मूल से ख़त्म करने में महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका निभाई थी। साथ ही वे तंबाकू और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में भी सबसे आगे रहे और उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए अथक प्रयास किए और स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम द्वारा दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान न करने सहित कई कानूनों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इस कानून को लागू करने का निर्देश दिया था I कालांतर में देश के 12 राज्यों ने इसी तरह के कानून बनाए। डॉ. हर्ष वर्धन ने पहली बार तर्कसंगत दवा नीति लागू करने में भी अहम भूमिका निभाई जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) ने दिल्ली मॉडल के रूप में मान्यता दी थी और इसे दुनिया के कई अन्य देशों द्वारा भी अपनाया गया था।

डॉ. हर्षवर्धन को मई 1998 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो शहर में एक समारोह में समाज के लिए उनके बहुमुखी योगदान के लिये डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक पदक से सम्मानित किया गया। वे यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बनेI इसी प्रकार जनवरी 2001 में, तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के ‘पोलियो उन्मूलन चैंपियन पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री वाजपेयी ने उन्हें ‘स्वास्थ्य वर्धन’ विशेषण से सम्मानित किया ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री मंडल में केंद्रीय मंत्री के रूप में 2014 के बाद से ही उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। विशेषकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में, भारत में वर्तमान कोविड-19 संकट के प्रबंधन में डॉ. हर्षवर्धन के सक्रिय दृष्टिकोण ने भारत में महामारी की गति को कम करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने थोड़े समय के भीतर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया और कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में बीस लाख से अधिक फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं को तैयार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मंत्री समूह का अध्यक्ष भी बनाया और भारत ने उनके सक्षम नेतृत्व में, समय पर सभी आवश्यक कदम उठाए, जिसमें देश की सीमाओं, जल और वायु सभी प्रकार के प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी, विदेशों में फंसे नागरिकों की निकासी, मजबूत रोग निगरानी नेटवर्क, जोखिम संचार और सामुदायिक भागीदारी से बड़े पैमाने पर सामुदायिक निगरानी तथा मीडिया के माध्यम से जनचेतना और शिक्षण का माहौल आदि सभी उपाय सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने देश में 24 घंटे की हेल्पलाइन ‘कोविड इंडिया सेवा’ भी शुरू की I इससे इस नए घातक वायरस का शिकार हुए लाखों भारतीयों को एक इंटरैक्टिव मंच मिला । यह हेल्पलाइन मंत्रालय और ट्विटर इंडिया के बीच एक पहल बनी और इसने वास्तविक समय में पारदर्शी ई-गवर्नेंस डिलीवरी को सक्षम किया और कोविड-19 जैसी महामारी के समय नागरिकों को उनके प्रश्नों के तेजी से जवाब दिए । इसी तरह उन्होंने ‘सन्डे संवाद’ के द्वारा भी लोगों के कौतुहल को शांत करने का प्रयास कियाI विज्ञान और प्रौद्योगिकी के रूप में उनका ध्यान देश के वैज्ञानिकों को नई तकनीकों, प्रक्रियाओं और उत्पादों के साथ आगे आने के लिए प्रेरित करने पर रहा है जिसके फलस्वरूप देश के वैज्ञानिक स्वदेशी वैक्सीन बनाने के लिए अनुसन्धान और विकास सहित वायरस का इलाज खोजने पर दिन-रात काम कर रहें हैं ।

डॉ हर्ष वर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के वर्ष 2020-21 के लिए अध्यक्ष निर्वाचित किए गए है । कार्यकारी बोर्ड के 147वें सत्र की एक वचुर्अल बैठक में उन्हें निर्वाचित किया गया। डॉ. हर्ष वर्धन ने 22 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला । उन्होंने जापान के डॉ. हीरोकि नाकातानी का स्थान लिया है, जो डब्ल्यूएचओ के 34 सदस्यों के बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष थे । डॉ हर्ष वर्धन के उल्लेखनीय करियर में यह एक और महत्वपूर्ण सम्मान है।

डॉ हर्ष वर्धन भारतीय राजनीति के जुझारू नेता हैं और अब डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष बन विश्व के स्वास्थ्यनायक बनने की ओर अग्रसर है। देश की वर्तमान राजनीति में वे एक दुर्लभ व्यक्तित्व हैं। चिकित्सा-विशेषज्ञ और कुशल प्रशासक के साथ साथ एक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है। वे कर्मयोगी हैं, देश की सेवा के लिये सदैव तत्पर रहते हैं, किसी पद पर रहे, हर स्थिति में उनकी सक्रियता हमेशा जीवंत रहती है। वे राष्ट्रवादी सोच की राजनीति में विश्वास करते है। वे सिद्धांतों एवं आदर्शों पर जीने वाले व्यक्तियों के प्रतीक हैं।