भृष्टाचार पर नकेल कसने पर शहर के प्रथम नागरिक की जान पर आफत, हुआ जानलेवा हमला

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रुड़की/ देहरादून

विजित त्यागी

प्रदेश में भाजपा सरकार के आने के बाद से प्रदेश भर में भृष्टाचारियो पर कड़ा प्रहार हुआ व काफी हद तक भृष्टाचारियो पर नकेल भी कसी गयी परन्तु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व के बावजूद भाजपा से ही जुड़े कुछ व्यक्ति सरकार की छवि को धूमिल करने के भरसक प्रयास कर रहे है।

मामला प्रदेश के रुड़की से सामने आया है जहाँ भृष्टाचारियो पर नकेल कसने पर रुड़की नगर निगम के मेयर को अपनी जान के लाले पड़ गए है , रुड़की नगर निगम के मेयर गौरव गोयल जो भाजपा के पुराने कार्यकर्ता है व निर्दलीय मेयर निर्वाचन के पश्चात पुनः भाजपा संगठन में शामिल हुए है , गौरव गोयल साफ छवि व कुशल व्यवहार के व्यक्ति माने जाते है ।

मेयर चुने जाने से पूर्व भी गौरव गोयल सामाजिक कार्यो में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे है , राजनीति की शुरुआत से ही मेयर गौरव गोयल भाजपा के प्रति पूर्णतः समर्पित रहे ,यह मेयर गोयल के समर्पण का ही नमुना था की निर्दलीय चुनाव लड़ने के बावजूद जीतने के बाद उन्होंने पुनः भाजपा में जाना ही निश्चित किया और पार्टी ने भी उनका ससम्मान स्वागत किया ।

शायद यही बात पार्टी के कुछ थाम्बेदार हजम नही कर पाए और उन्होंने मेयर गोयल के खिलाफ लॉबिंग करना शुरू कर दिया , उस लॉबिंग का असर यह हुआ की मेयर गौरव गोयल की पारदर्शिता व स्वच्छ छवि ही आज उनकी जान की दुश्मन बन गयी है ,  गौरव गोयल ने कल प्रेस कांफ्रेंस करके आरोप लगाया है की पार्टी से ही जुड़े कुछ सभासदों व नगर निगम के अधिकारियों ने उनके ऊपर जानलेवा हमला किया है , जिसकी नामजद रिपोर्ट उनकी ओर से दर्ज करा दी गयी है  , हालाँकि उसके पश्चात आरोपियों की ओर से भी तहरीर देने की सूचना सामने आई है ,

मेयर गौरव गोयल के अनुसार उनके द्वारा नगर निगम में सड़क निर्माण व अन्य कार्यो में हो रही धांधलेबाजी की जाँच कराने के कारण उनपर जानलेवा हमला किया गया है ।

परन्तु यहाँ बड़ा सवाल है की क्या भृष्टाचारियो पर नकेल कसने के खामियाजा के रूप में शहर के प्रथम नागरिक को अपनी जान की हिफाजत की गुहार के रूप में चुकाना पड़ेगा  ?

देखना है संगठन व सरकार अपने बेलगाम हो चुके  अधिकारियों व कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही कर पुनः भृष्टाचार मुक्त प्रदेश की प्रतिबद्धता कैसे प्रकट करता है।

 

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