चीन का नया प्रोपेगेंडा, ठंड से बचने के लिए तैयार चीनी सैनिक, भारतीय सुरक्षा नाकाफी।

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नई दिल्ली : सर्दी की आमद से पहले ही चीन ने अपने सैनिकों को ठंड से राहत देने की पूर्ण व्यवस्था करने ठानी है , अपनी कूटनीति फैलाता चीन फिर भारतीय सीमा के पास अपने पैर फैलाना शुरू कर दिये है और भारत-चीन सीमा पर पूरी तैयारी करने का दावा कर रहा है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा है कि, भारत-चीन सीमा पर चीनी फ्रंटलाइन सैनिक आने वाली सर्दियों के लिए रसद की तैयारी कर रही है और पहली बार अधिकारियों और सैनिकों के रहने को लेकर अच्छी व्यवस्था की गई है।

चीनी मीडिया ने प्रोपेगेंडा में कहा है कि, नई सुविधाओं के बाद अब भारत-चीन सीमा पर तैनात होने वाले सैनिकों को वहां की कठिन परिस्थितियों में रहने में मदद मिलेगी।
भारत-चीन सीमा पर सर्दी में संघर्ष होने की संभावना नहीं हैं, हां, छोटे स्तर पर तनाव हो सकते हैं। इसका मतलब ये है कि, सीमा पर तैनात होने वाले सैनिकों के लिए सर्दी में वहां रहना बहुत बड़ी चुनौती है, लेकिन उसके लिए रसद पहुंचाना बहुत जरूरी है। सीमा पर भारत के मुकाबले चीनी सैनिकों को फायदा मिलने वाला है। भारतीय सैनिकों को कठोर सर्दियों का सामना करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और इसकी तैनाती को बनाए रखने की लागत बहुत बड़ी हो सकती है और सरकार से सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का निर्माण या सुधार करने का आग्रह किया जाता है।
सर्दी से पहले सरहद पर भारत की तैयारी को ‘झांसा’ बताया है और भारत की तैयारी को झांसा बताया है। ”भारत सीमा पर अपर्याप्त आपूर्ति कर रहा है, जिससे भारतीय सैनिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है”। ‘जो दिक्कत भारतीय सैनिकों को हो रही है, वो चीनी सैनिकों को नहीं होने दी जाएगी, क्योंकि दक्षिण-पश्चिम चीन के शिनजियांग प्रांत के सैन्य कमांडर इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि, सीमा पर तैनात पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के जवानों को रसद सामग्री के साथ तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए”।
सरहद पर चीन की तरफ से नई टेक्नोलॉजी के तहत नवाचारों को लाया गया है।

आधुनिक डिटेक्शन डिवाइस चीनी सैनिकों को सैन्य चौकियों के अंदर स्थितियों का निरीक्षण करने की अनुमति देते हैं। फ्रंटलाइन सैनिक आधुनिक कमांड सिस्टम के साथ जानकारी एकत्र और प्रबंधित भी कर सकते हैं। ऑक्सीजन की कमी की समस्या को हल करने के लिए, पोर्टेबल ऑक्सीजनेटर, ऑक्सीजन कक्ष , और व्यक्तिगत ऑक्सीजन आपूर्ति उपकरण फ्रंटलाइन सैनिकों के लिए व्यापक उपयोग में हैं। वहीं, हाई एल्टीट्यूड वाले पठार पर बैरकों को कोयला, बिजली और सौर ऊर्जा जैसे कई ऊर्जा स्रोतों से संचालित और गर्म किया जाता है।जिसमें सर्दी से पहले जान- बूझकर चीनी सैनिकों की तैयारिकों के बारे में बताया गया है।

दरअसल, पिछले साल से चीन के सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सीमा रेखा के अंदर सैनिकों को रखना शुरू किया है। लेकिन, सर्दी के मौसम में उन स्थितियों में सैनिकों के लिए रहना आसान नहीं होता है। भारत के सैनिक खास तौर पर उन स्थितियों के लिए तैयार होते हैं, लिहाजा उन्हें ज्यादा दिक्कतें नहीं होती है। जबकि, पिछले एक साल में चीन को अपने 50 हजार सैनिकों को बदलना पड़ा है, जबकि, चीन की तरफ से चौथी बार कमांडर को बदलना पड़ा है। चीन के ज्यादातर सैनिक गंभीर बीमार पड़े हैं, लिहाजा चीन ने इस बार सीमा रेखा पर तनाव बढ़ाने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराकर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की है।

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