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कविता-शायरी

हम क्या कर रहे हैं?

आज लगभग जीवन के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चाहे हम राजनीति की बात करें , साहित्य -कला, खेल या क्यों न फिर किसी अन्य सरकारी/ नीजी प्रतिष्ठानों की , अक्सर देखा जा रहा है कि प्रत्याशियों का चयन जाति, धर्म, धन एवं बाहुबल के आधार पर किया जा…

“सिगरेट”

रोज़ देखती हूँ सामने खिड़की से छत पर आता है एक बूढ़ा बार बार कितनी बार घूमने??? नहीं नहीं देखने जवान लड़का उसका चला आता है छत पर चुपचाप कभी उदासीयाँ छिपाने, कभी रोने ज़्यादातर सुलगाने अपनी सिगरेट खोया है उसने किसी को शायद कोई अपना…

शाश्वत

खुले आसमान की लकीरों पर ढलता सूरज एक मौन निमंत्रण दे रहा है, संध्या के वक्ष पर कालिमा में उसने संवरती एक दुल्हन का चित्र अंकित किया है । भोर भी उजास से बेफिक्र भविष्य की नींव रख रही है, शब्द की संरचना से ओत प्रोत मन का गजरा महका…

सिम्मी हसन की शानदार पेशकश

"अग्नि" पवित्र अग्नि निगल जाती है कितनी कितनी लाशें फूस के छप्पर बड़े बड़े मकान कम दहेज लाई दुल्हनें सुनहरे बालियों भरे खेत पर अक्सर ग़रीब के चूल्हे में इसका बस नहीं चलता और ये वोट ले कर जीत जाने वाले नेताओं की तरह अक्सर ग़ायब…

डॉ स्वाति (कशिश) की बेहतरीन प्रस्तुति

अपेक्षा है मुझे ... प्रत्युत्तर की ..!..क्यों बनाया मैंने स्वयं को शिलाखंड! ...क्यों हृदय को समायोजित कर लिया... एक अभेद्य दुर्ग में! ...लौट जाती हैं उस पाषाण से टकराकर... भावनात्मक लहरें! ...क्यों द्रवित नहीं करते अब मुझे... अश्रुपूर्ण…

अस्तित्व

जाने क्यों मुझे उकेर दिया गया था पत्थर की दीवार पर हर किसी ने ढूंढी कमियाँ और अपनी अपनी कोशिशों में मुझे उतारना चाहा अपने मानदंडों पर मैं भी मैं न हो कर वो बनने की कोशिश में कितनी कितनी बार टूटी यहाँ तक कि मेरे अस्तित्व के कितने…

कैसे भूले वो दिन प्यारे ,जब हम भी बच्चे कहलाते थे ।

कैसे भूले वो दिन कैसे भूले वो दिन प्यारे ,जब हम भी बच्चे कहलाते थे । हर ओर राज चलता था अपना,घर के राजकुमार कहलाते थे ।। दादी माँ के राजदुलारे , दादा जी के कुंवर थे हम । माताजी के हम थे कान्हा, और दीदी के बन्दर हम ।। बैठ कर पाया के…

जाने वाले तुझे क़सम है|

जाने वाले तुझे क़सम है कि तू तेरा इंतज़ार लेता जा शब भर की बेबसी ले जा दिल ए बेइख़्तियार लेता जा लौटना जब तेरा नहीं मुमकिन मेरी आँखों के ख़्वाब लेता जा गुल ओ नग्मों की बात रहने दे चश्म ए नम साथ अपने लेता जा जाने वाले तुझे क़सम है कि तू…

कौन है ❓

गगन के उस पार क्या, पाताल के इस पार क्या है? क्या क्षितिज के पार? जग जिस पर थमा आधार क्या है? दीप तारों के जलाकर कौन नित करता दिवाली? चाँद - सूरज घूम किसकी आरती करते निराली? चाहता है सिन्धु किस पर जल चढ़ाकर मुक्त होना? चाहता…

दीप से दीप जलाएं|

दीप से दीप जलाएं पिया, आओ दिवाली मनाएं पिया.२ मन में उमंग है खुशियों के रंग है. धरती सजी यू अँखियाँ भी दंग है.. रंगोली के रंगों से अब घर आँगन को सजाएं पिया. आओ दिवाली मनाएं पिया.. लक्ष्मी विराजे गणपति के संग. आभूषण से, भर दे माँ के…