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एक जिले में वैध तो दूसरे जिले में अवैध है तेल का काला कारोबार , बड़ा खेल हुआ उजागर

सहारनपुर/मुज़फ्फरनगर

मामला इस प्रकार है की मुख्यमंत्री द्वारा चलाए गए शिकायती पोर्टल पर दो एक जैसी शिकायत अलग अलग जिलो में अवेध रूप से चल रहे पेट्रोल पम्प्स को लेकर की गई, दोनों ही शिकायतों में प्रथम आख्या अवैध पेट्रोल पंप संचालको के पक्ष में लगाई गई ,
जिसको लेकर शिकायतकर्ता द्वारा दिये गए फीडबैक से असन्तुष्ट होते हुए पुनः जांच की मांग की, जिस पर जिला सहारनपुर से जुड़ी एक शिकायत पर जिलाधिकारी सहारनपुर ने संज्ञान लिया और जाँच को गंभीरता से करने के आदेश दिए, जिस पर पूर्व में जांच कर अवैध कारोबारियो के पक्ष में रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले आपूर्ति निरीक्षक ने दोबारा की गई जाँच में अवैध पट्रोल पम्प की शिकायत को सही मानते हुए अवैध पट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कार्यवाही करते हुए जनपद सहारनपुर की कोतवाली देवबन्द में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 में अभियोग पंजीकृत कराया ।

 

(जिला सहारनपुर की शिकायत)
(जिला सहारनपुर जाँच अधिकारी द्वारा दी गयी आख्या)

वही दूसरी ओर जिला मुजफ्फरनगर से जुड़ी वैसी ही शिकायत में, जिसमे आपूर्ति निरीक्षक द्वारा अवैध पेट्रोल पम्प के संचालको के पक्ष में अपनी पहली आख्या प्रस्तुत कर मामले का निस्तारण कर दिया था ,
उक्त शिकायत में भी शिकायतकर्ता ने आख्या पर असंतोष का फीडबैक दिया तो मुज़फ्फरनगर जिलापूर्ति अधिकारी ने जांच दोबारा करने के आदेश दिए जिस पर जाँचकर्ता आपूर्ति निरीक्षक द्वारा अवैध पट्रोल पम्प को हरी झंडी देते हुए मामला नापतौल विभाग का बताते हुए आख्या भेज कर शिकायत का निस्तारण कर दिया ।

(जिला मुजफ्फरनगर में की गई शिकायत)

 

(जनपद मुजफ्फरनगर जांच आख्या)

यहाँ बड़ा सवाल उठता है मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल IGRS को जांचकर्ता कितनी लापरवाही से उपयोग कर रहे है , यहाँ दो जिले के दो एक जैसे मामले में एक मे एफआईआर व दूसरे मामले में क्लीन चिट देना विभाग के साथ साथ मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

एक जिले में अवैध कारोबार पर जहाँ शिकंजा कसा जा रहा है वही दूसरे जिले में अवैध कारोबार करने वालो को स्पष्ठ संरक्षण देने का मामला प्रतीत होता है , अब देखना ये है की गुड़ गवर्नेंस किस तरह ऐसे अधिकारियों पर लगाम लगाती है।