अनुज त्यागी

लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं भाजपा का यूपी में ग्राफ काफी गिर गया है भाजपा के परंपरागत वोट बैंक भूमिहार समाज में भाजपा को वोट करने की उदासीनता दिखाई दी

भाजपा का परंपरागत वोट बैंक भूमिहार समाज बिखरा नजर आया,साइकल की भी की सवारी,भाजपा को हुआ नुकसान

जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के बूथ पर भारतीय जनता पार्टी गाजीपुर में हार गई। बूथ नंबर 52 में बीजेपी को समाजवादी पार्टी ने करारी शिकस्त दी।

2019 में भी अफजाल अंसारी ने सिन्हा को गाजीपुर हराया था और इस बार सिन्हा के खासमखास पारसनाथ राय को भी अंसारी ने गाजीपुर में ही करारी शिकस्त दी। गाजीपुर में बीजेपी पस्त पड़ी।

सिन्हा की अपनी भूमिहार बिरादरी ने पूर्वांचल में बीजेपी का दामन छोड़ पहली बार समाजवादी पार्टी का खुला साथ दिया है। इसके पहले भूमिहारों ने कभी भी साइकिल की सवारी नही की थी। ये पहली मर्तबा है। सूर्य प्रताप शाही अपनी विधानसभा पथरदेवा तक हारे जो भूमिहार बाहुल्य है।

घोसी मऊ में भूमिहारों ने राजीव राय की तरफ एकतरफा मतदान किया। राजीव सांसद बन गए। हालांकि उन्हें सभी समाज का वोट मिला लेकिन भूमिहार पूरा मिला,

पूर्वांचल के में भूमिहार समाज के बड़े नेता नारद राय को भी आखरी समय पर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी से भाजपा में शामिल कराया था और नारद राय की बीजेपी जॉइनिंग खुद गृहमंत्री अमित शाह के द्वारा कराई गई थी लेकिन उसके बावजूद बलिया में भूमिहार समाज सपा के सनातन पांडये के साथ नजर आया,

वही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और बनारस लोकसभा सीट से गठबंधन प्रत्याशी अजय राय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने लगभग 4.75 लाख वोट लेने में सफल रहे और उन्होंने नरेंद्र मोदी की पिछली जीत का आंकड़ा 4.79 लाख से घटकर 1.52 पर पहुंचा दिया एक समय यह भी स्थिति रही जब अजय राय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आगे चल रहे थे वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी भूमिहार समाज का वोट बिखर गया अपने समाज के निर्दलीय प्रत्याशियों से लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी गठबंधन को भी खुलकर वोट करता नजर आया, मुजफ्फरनगर बिजनौर लोक सभा सीटों पर भूमिहार समाज अपने निर्दलीय प्रत्याशियों को भी वोट करता दिखाई दिया जिसका सीधा-सीधा नुकसान भाजपा गठबंधन को हुआ है,

बात करे भूमिहार समाज की तो यूपी में भूमिहारों की आबादी का करीब 3 फीसदी है, भूमिहार आबादी पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कुछ इलाकों में सिमटे हैं। पूर्वांचल में भूमिहार आबादी आधा दर्जन से अधिक जिलों में अपनी अहमियत दिखाते हैं। वहीं, पश्चिमी यूपी का त्यागी समुदाय भूमिहार के तौर पर जाना जाता है।

पूर्वांचल के प्रमुख जिलों गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, घोसी, गाजीपुर, चंदौली, कुशीनगर, देवरिया, सलेमपुर मिर्जापुर, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, भदोही, महराजगंज और जौनपुर की सीटों पर भूमिहार मतदाताओं का प्रभाव देखने को मिलता है। इनमें से भी चार सीटों घोसी, बलिया, गाजीपुर और वाराणसी में भूमिहार नेताओं का असर साफ तौर है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, बिजनौर, सहारनपुर,अमरोहा, संभल ,मुरादाबाद, नोएडा बुलंदशहर,नगीना, कैराना आंशिक में भूमिहार त्यागी समाज के प्रभाव को कोई भी दल नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

अब भारतीय जनता पार्टी के सामने भूमिहार समाज को साधने का काम करना होगा जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान का सामना न करना पड़े क्योंकि भूमिहार समाज प्रदेश भर में 25 से 30 विधान सभा सीट पर अपनी पकड़ रखता है, पश्चिम में भूमिहार समाज को इस बात पर भी नाराजगी है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कोई भी समाज का विधायक यूपी सरकार में मंत्री नहीं बनाया गया है और केवल समाज को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया है।।

अनुज त्यागी/8171660000

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