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कड़वी सच्चाई पत्रकार मयूर शुक्ला के साथ

राजसत्ता पोस्ट

कड़वी सच्चाई मयूर शुक्ला के साथ

आज कोरोना काल की इन विषम परिस्थितियों में जहां एक तरफ राक्षस समान लोग कालाबाजारी में लगे हैं ऑक्सीजन को 100 गुना महंगे दामों में बेच रहे हैं वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के मेंहदीगंज के चांद कुरैशी भाई रोज सैकड़ों लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचा रहे हैं। लेकिन क्या आप सोंच सकते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों को मुफ्त में ऑक्सीजन देकर उनकी रक्षा कर रहा है उसी के परिवार के एक व्यक्ति की जान ऑक्सीजन की कमी के चलते हो जाती है। ऐसा हुआ क्यूं? इस सवाल का जवाब है यूपी सरकार का एक फरमान। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने एक आदेश जारी किया कि विषम परिस्थितियों के अलावा किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर ऑक्सीजन नहीं मिलेगी सिर्फ अस्पतालों को ही दी जाएगी। ऐसे आदेश के बाद चांद कुरैशी भाई को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गई और उनके सिलेंडर जब्त कर लिए गए। अब वो ना तो उन लोगों की मदद कर सकते हैं जिन्हें घर या अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत है और ना ही अपने प्रिय जन को बचा पाए। अब मेरे सरकार से कुछ सवाल हैं।

1 – मुख्यमंत्री जी क्या इस आदेश के बाद अस्पतालों को भरपूर ऑक्सीजन मिलने लगी?
2 – क्या जो व्यक्ति अस्पताल में बेड खाली ना होने के कारण घर में आइसोलेट है और उसे ऑक्सीजन की जरूरत है उसे मिल पाएगी?
3 – आपकी सरकार ने ही होम क्वारंटाइन का नियम जारी किया तो क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं बनती की आप लोगों के घर पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराएं।
4 – क्या 5 घंटा लाइन में लगकर ऑक्सीजन लेने वाला व्यक्ति वहां पर मौज या टाइम पास के लिए खड़ा है?

मुख्यमंत्री जी इन सवालों के जवाब आपको देने होंगे। घर और अस्पताल में ऑक्सीजन ना होने के कारण लोग अपने प्रिय जनों को बचाने के लिए घंटो लाइन में लगकर ऑक्सीजन ले रहे थे आपने ये बंद करा दिया। जो व्यक्ति रोज सैकड़ों लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचा रहा था आज वो अपने परिवार के व्यक्ति को ही नहीं बचा पाया। अब जिन जरूरतमंदों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही उनकी जान की जिम्मेदारी किसकी है। आपके इस फैसले से जितने लोगों का जीवन छिना है मैं उसे महामारी की मौत नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या ही कहूंगा। ये सब लिख कर मेरा मकसद मुख्यमंत्री जी पर उंगली उठाना नहीं बल्कि जो सच है उसे सबके सामने लाना है। सलाह ये है कि अगर आप किसी की मदद नहीं कर सकते तो कम से कम उसके रास्ते में कांटा भी मत बिछाइए। लोग मर रहे हैं अपनों को खो रहे हैं स्थिति दयनीय है ये भावुक लोगों का देश है लोग अपनों को बचाने के लिए मजबूरन किसी भी हद तक जा सकते हैं जिससे अपराध में बढ़ोतरी भी हो सकती है। अतः आपसे निवेदन है कि जनता के हित में फैसले लीजिए और उनके नायक बनिए यही समय है अपने आपको जनता के लिए समर्पित कर देने का। प्रदेश और देश आपका है तो लोगों की जिम्मेदारी भी आपकी है और सलाम है उन लोगों को जो इस आपदा में निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहे हैं। लोगों से भी मेरी यही गुजारिश है कठिन समय है एक दूसरे का साथ दीजिए हिम्मत बनिए सब सही होगा। इरादे निडर हों तो किसी भी मुश्किल का सामना मजबूती से किया जा सकता है।मेरी ईश्वर से यही गुजारिश है कि जल्द इस महामारी से पूरी दुनिया को छुटकारा मिले। जय हिन्द जय भारत।

मयूर शुक्ला पत्रकार(लखनऊ)