Home कविता/शायरी बनारस

बनारस

जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है,
बनारस की गलियों में मैने साक्षात शिव को देखा है,
जा कर द्वशाशमेध पर मैंने कितने  अभिज्ञानियों को देखा है,
संकट मोचन में मैने कितने बजरंगबली को देखा है
बनारस में मैने जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
बाबा विश्वनाथ के दर पर जाकर मैंने श्रद्धा का अद्भूत रूप देखा है,
मां अन्नपूर्णा के दरबार में मैने अन्न का अटूट भंडार देखा है,
यहां के कण कण में मैने शिव का वास देखा है
बनारस में मैने जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
मणिकर्णिका पर मैंने पार्थिव शरीरों को पंच तत्व में विलीन होते देखा है,
वहा जा कर मैने जीवन और मृत्यु के सच को जाना है,
गंगाजल को माथे पर लगाते ही मैंने अपने सारे दुखों को दूर होते देखा है,
हां ये मेरा बनारस है जहा मैने जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
लोगो को छोटी छोटी चीजों में खुश होते देखा है,
पता पूछने पर घर तक पहुंचाते देखा है,
बनारस की हर गली में मैने अच्छाई का अलग अलग स्वरूप देखा है,
मैंने बनारस के लोगो में अपनापन देखा है,
बनारस में मैने जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
राजा और रंक सबको एक जगह मिलते देखा है,
यहां के शमशानों में मैने सबको एक जैसे बिलखते देखा है,
नवरात्रि और सावन के मेलों में मैने लोगो को खुशियां खोजते देखा है,
मां की भक्ति और शक्ति का अद्भूत रूप देखा है,
मैंने बनारस में जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
मैने दूर दूर से छात्रों को यहां आकर पढ़ते देखा है,
मैंने BHU की लाइब्रेरी से लेकर हर एक मोड़ तक को देखा है,
मैंने लोगो को चाव से कोल्डकॉफी और चाय का लुफ्त उठाते देखा है,
मैंने vt पर छात्रों का जमावड़ा देखा है,
मैंने मधुबन से लेकर Agriculture Farm तक की शाम देखी है,
बिरला, ब्रोचा , एमएमवी ,त्रिवेणी , मूनादेवी से लेकर राजाराम और भगवानदास छात्रावास देखा है,
मैंने BHU में एक अलग ही जीवन देखा है,
मैंने मालवीय जी के लिए छात्रों के दिलो में एक अद्भुत श्रद्धा देखी है,
बनारस में आकर मैंने शिक्षा का वास्तविक स्वरूप देखा है,
मैंने बनारस में जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।
मैंने यहां की अद्भुत गंगा आरती से लेकर सुबह ए बनारस तक को देखा है,
मैंने घाट पर लोगो को सुकून पाते देखा है,
मैंने सुंदरलाल हॉस्पिटल में लोगो को जीवन पाते देखा है,
मैंने बनारस में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल देखा है,
यहां मैंने दोनो को साथ साथ चलते देखा है,
हा , यही वो मेरा बनारस है जहा मैंने जीवन और मृत्यु का संगम होते देखा है।

दीक्षा त्रिपाठी