दक्षिण अफ्रीका के ‘आर्चबिशप’ डेसमंड टूटू का 90 साल में निधन, राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने जताया शोक

केप टाउन। नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दक्षिण अफ्रीका के आर्चबिशप रह चुके डेसमंड टूटू का निधन हो गया है। रविवार को देश के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने शोक जताते हुए बताया कि डेसमंड टूटू की 90 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई है। उन्हें दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी प्रतीक के रूप में जाना जाता था।

राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा, आर्चशिप एमेरिटस डेसमंड टूटू का निधन दक्षिण अफ्रीका की एक बहादूर पीढ़ी का अंत है जिन्होंने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष कर हमें एक नया दक्षिण अफ्रीका दिया है। रामफोसा ने कहा, उन्होंने खुद को गैर-सांप्रदायिक, मानवाधिकारों के यूनिवर्सल चैंपियन के रूप में प्रतिष्ठित किया है। राष्ट्रपति ने मौत के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। आर्चबिशप डेसमंड टूटू के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा, डेसमंड टूटू विश्व स्तर पर अनगिनत लोगों के लिए एक मार्गदर्शक थे। मानवीय गरिमा और समानता पर उनका जोर हमेशा याद किया जाएगा।

रंगभेद के अहिंसक विरोध के लिए 1984 में टूटू को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। 1990 के दशक के अंत में टूटू को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था और हाल के वर्षों में उन्हें अपने कैंसर के इलाज से जुड़े संक्रमणों के इलाज के लिए कई मौकों पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने काले दक्षिण अफ्रीकियों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए एंग्लिकन चर्च में अपनी हाई-प्रोफाइल भूमिका का इस्तेमाल किया। यह टूटू ही थे जिन्होंने नेल्सन मंडेला के देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बनने पर दक्षिण अफ्रीका का वर्णन करने के लिए ‘रेनबो नेशन’ शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने 1955 में लिआ से शादी की। उनके चार बच्चे और कई पोते-पोतियां हैं, और जोहान्सबर्ग के पास केप टाउन और सोवेटो टाउनशिप में उनके घर हैं।

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