उत्तर प्रदेश में गठबंधन दलों की सरकार के भविष्य का विश्लेष्ण-अशोक बालियान

उत्तर प्रदेश में गठबंधन दलों की सरकार के भविष्य का विश्लेष्ण-अशोक बालियान

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राजसत्ता पोस्ट न्यूज पोर्टल

उत्तर प्रदेश में गठबंधन दलों की सरकार के भविष्य का विश्लेष्ण-अशोक बालियान, पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में सात चरणों में मतदान कराने का फ़ैसला किया है।भारतीय जनता पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी अपने-अपने स्तर पर ज़ोर-आजमाइश कर रही हैं, लेकिन बड़ी पार्टियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के तमाम छोटे दल भी इस चुनाव में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
इस समय उत्तर प्रदेश में सारे सिद्धांतों को ताक पर रखकर ग़ैर बीजेपी के सिद्धांत पर सब छोटे दल सपा के साथ बेमेल गठबंधन करने में लगे हुए है। लेकिन विपक्ष के ये गठबंधन करने वाले ये नेता यह भूल रहे है कि चुनावी राजनीति केवल अंकों का खेल नहीं है।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार में उसकी भूमिका जाटों के प्रति नकारात्मक रही, थी और उसी कारण मुज़फ्फरनगर में दंगे हुए थे।इसलिये इस चुनाव में समाजवादी पार्टी व् राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन कितना सफल होगा, यह भविष्य में चुनाव के नतीजों के बाद पता चलेगा। वर्तमान में अतीत की कुछ ऐसी कड़वी सच्चाइयां भी हैं जिनसे मुंह नहीं फेरा जा सकता है।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नज़र डालें तो एक बात के संकेत मिलते हैं कि उत्तर प्रदेश में मतदाता किसी एक पार्टी को बहुमत दे रहे हैं, लेकिन इस बार चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेता छोटी पार्टियों को अपने साथ लाने की कोशिशें करते दिख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में चार ऐसे तबके हैं जिनकी मौजूदगी पूरे उत्तर प्रदेश में है, इनमें ब्राह्मण, ठाकुर, दलित और मुसलमान शामिल हैं। इनके अलावा अन्य जातियों के अलग-अलग इलाके हैं और इन इलाकों के अपने नेता हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ये इतिहास रहा है कि जब-जब यूपी में राष्ट्रीय पार्टियां मजबूत होती हैं, तो इसका नुकसान क्षेत्रीय पार्टियों को उठाना पड़ता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है।
उत्तर भारत का उत्तर प्रदेश अकेला राज्य है जहाँ बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था के बावजूद गठबंधन की राजनीति कभी सफल नहीं हुई। ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने गठबंधन की राजनीति के प्रयोग से तौबा कर लिया है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने के लिए सपा ने छोटे-छोटे दलों से गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी पूर्ण कर ली है। यह गठबंधन किसी भी प्रकार के लोक कल्यणाकारी कार्य या विकास के लिए नहीं लगता है, बल्कि योगी को रोकने के लिये सियासत का महायोग लगता है। अब आगे देखना यह है कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष की मुख्य पार्टी समाजवादी पार्टी द्वारा मौकापरस्ती पर आधारित गठजोड़ बनाना उन्हें कितनी कामयाबी दिलाता है।

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