Home स्पेशल हाथरस प्रकरण का विश्लेषण, पूर्व डीजीपी बृजलाल उत्तर प्रदेश की कलम से

हाथरस प्रकरण का विश्लेषण, पूर्व डीजीपी बृजलाल उत्तर प्रदेश की कलम से

हाथरस प्रकरण

हाथरस प्रकरण में तमाम तथ्य सामने आ रहे है। मैंने उचित समझा क़ि क्यो इस विषय पर महत्वपूर्ण तथ्य आप लोगों से साझा करूँ।
1-घटना सुबह 9.30 बजे हुई और पीड़ित लड़की अपने भाई सत्येंद्र के साथ थाना चन्दपा पहुँची और 10.30 बजे सुबह भाई ने लिखित रिपोर्ट लिखायी। रिपोर्ट में संदीप ठाकुर को नामज़द किया क़ि संदीप ने उससे मारपीट की और गला दबाया।
पुलिस ने तुरंत धारा 307 IPC v धारा 3(2)5 SC/ST Act का मुक़दमा संदीप के ख़िलाफ़ क़ायम किया। संदीप गिरफ़्तार हो गया।
2-पीड़ित लड़की को पहले हाथरस और बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज भेजा जहाँ उसका इलाज शुरू हुवा। पीड़ित के गले पर गम्भीर चोट और पीठ पर रगड़ पाया गया ।बलात्कार नही पाया गया। इसी बीच सोसल मीडिया और कुछ अन्य मीडिया ने भ्रम फैलाया क़ि लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुवा और उसकी जीभ काट ली गयी, हाथ- पैर तोड़ दिये गए , जो सरासर झूठा था।
3-19-9-20 को डीएसपी रामशब्द यादव ने परिवार की मौजूदगी में बयान लिया और उसकी रिकार्डिंग भी की।यहाँ लड़की ने संदीप द्वारा मारपीट के अलावा छेड़-छाड की बात कही गयी जिसपर धारा 354 IPC की धारा बढ़ा दी गयी।
4- 22-9-20 को पीड़ित लड़की पुनः बयान बदलती है और अपने साथ संदीप के अलावा तीन और के ऊपर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगा दिया गया। सभी आरोपी ठाकुर है। अन्य तीन को भी गिरफ़्तार कर लिया गया| इस बयान के बाद सामूहिक बलात्कार की धारा भी लगा दी गयी।
सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के जज की निगरानी में CBI जाँच की संस्तुति कर दी और जाँच के लिए गृहसचिव की अध्यक्षता में SIT भी गठित कर दी।
एसपी हाथरस और अन्य पुलिसकर्मियों को निलम्बित कर दिया गया।
5- घटना में मोड़ तब आता है जब भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण अपने लोगों के साथ लड़की को देखने मेडिकल कॉलेज पहुँच गए और घटना को बढ़ा- चढ़ा कर बताना शुरू कर दिया।
भीम आर्मी ने अन्य ज़िलों में धरना- प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
6-28-9-29 को पीड़ित को सफ़दरगंज दिल्ली शिफ़्ट कर दिया गया।29-9-20 को लड़की का देहांत हो गया। पार्थिव शरीर को मारचरी भेज दिया गया। मारचरी को चंद्रशेखर रावण भीम आर्मी, उदितराज पूर्व एमपी और अन्य कांग्रेसी नेता, आम आदमी पार्टी की राखी बिरला और अन्य ने भीड़ इकट्ठा करके घेर लिया। लगभग दस घंटे तक लाश को रोके रखा। बड़ी मुश्किल से शव वहाँ से निकाला जा सका। रास्ते में भीम आर्मी ने लाश छीनने का प्रयास किया।
7- इसी बीच तमाम लोग पीड़िता के गाँव पहुँच गए। पुलिस को सूचना मिली की हाथरस में भीम आर्मी, कोंग्रेस , आम आदमी पार्टी जातीय दंगे की साज़िश रच रही है। कुख्यात PFI और उसका सहयोगी संगठन ‘ कैम्पस फ़्रंट ऑफ़ इंडिया’ भी सक्रिय हो गया और 100 करोड़ से अधिक रुपये दंगा फैलाने के लिए झोक़ दिया। वह CAA के अन्दाज़ में दंगे करना चाहती थी।
7- ख़ुफ़िया सूत्रों से जानकारी मिल गयी थी क़ि सुबह लाश जलने नही दिया जायेगा और भयंकर तोड़- फोड़, आगज़नी, रेल की पटरी उखाड़ना जैसी घटना की जाएगी। इसी कारण परिवार की सहमति और उनकी मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
8-लड़की के परिवार को भीम आर्मी और PFI के गुर्गों और अन्य राजनीतिक दलों के लोगों ने घेर लिया और उन्हें गुमराह करने लगा।
9- राजनीतिक दलों ने भी अपनी रोटियाँ सेकना शुरू कर दिया।पहले से परेशान परिवार के लोग तमाम लोगों की अलग – अलग राय से मानसिक तौर पर पूरी तरह उलझ कर रह गये।
बहकावे में परिवार पहले CBI जाँच की माँग कर रहा था। जब योगी सरकार एक कदम आगे बड़कर सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जाँच की संस्तुति कर दी।
अब परिवार CBI जाँच और नार्को/ पालीग्राफ़ टेस्ट से मुकर रहा है, आख़िर क्यो, इसके पीछे तमाम चेहरे बेनक़ाब होंगे।
पहले मारपीट, फिर संदीप द्वारा छेड़छाड़ और आठ दिन बाद तीन और लड़कों के ऊपर सामूहिक बलात्कार का आरोप मढ़ दिया गया। आरोपित दो लड़के तो गाँव में थे ही नही।
पीड़ित लड़की की मौत गम्भीर मामला है और सही अपराधी पर कठोर कार्यवाई होनी चाहिये परंतु निर्दोष को दोषी कहना भी उचित नहीं है।

बृज़ लाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश

नोट – ये लेखक के निजी व स्वतंत्र विचार है।