मुजफ्फरनगर दंगों मे हुई नाइंसाफी पर सभी पार्टियां ,ओवैसी के सवालों के कटघरे मे।

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भारतीय किसान युनियन के नेता राकेश टिकैत का सियासी आधार पश्चिम यूपी के इलाके में टिका है. जाट-मुस्लिम वोटों के सहारे वो बीजेपी को 2022 के चुनाव में सबक सिखाने का दम भर रहे हैं. ओवैसी ने टिकैत के गढ़ मुजफ्फरनगर में चुनावी हुंकार भरकर पश्चिम यूपी कि सियासत में एक बार फिर से गर्मा दिया है. ओवैसी ने जिस तरह से मुजफ्फरनगर दंगे और मुसलमानों के साथ नाइंसाफी का जिक्र करते हुए सपा, बसपा, आरएलडी, कांग्रेस पर सवाल खड़े किए.

ओवैसी ने कहा कि 19 फीसद मुसलमान आज सियासी तौर पर मोहताज हैं. मुस्लिम सपा-बसपा को वोट देते रहे और दंगों का शिकार बनते रहे. हमें अपने वोट की सियासी ताकत पहचाननी होगी. भारत में आजादी का मतलब है, जिसकी लाठी उसकी भैंस. मुजफ्फरनगर के मुसलमान ने कभी बीजेपी का साथ नहीं दिया, फिर भी 2013 में यहां दंगा हुआ. मुसलमानों की नाइंसाफी की बात होती है तो सपा-बसपा-आरएलडी के नेताओं के माइक बंद हो जाते हैं.
ओवैसी ने कहा कि मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना में दंगा-फसाद हुआ था तो कहा गया भूल जाओ. अब फिर कहा जा रहा है कि मुजफ्फरनगर का फसाद भूल जाओ. ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों इन नाइंसाफियों को भूल जाएंगे तो दोबारा फिर नाइंसाफी होगी. ओवैसी ने कहा कि सपा की सरकार में 70 के करीब मुसलमान जीतकर आए थे तो मुजफ्फरनगर दंगा कैसे हुआ. सपा के मुसलमान विधायकों की जुबान पर ताला लगा दिया गया था. बंटवारे के बाद मुजफ्फरनगर में सबसे बड़ा कांड हुआ था उसे कौन भूल सकता है.

AIMIM प्रमुख ओवैसी ने मुसलमानों से कहा कि कब तक सपा, बसपा, कांग्रेस आरएलडी के लिए दरी बिछाने का काम करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी का एक ही मकसद है, गरीब मुसलमान की सियासी आवाज होनी चाहिए. जाट जब आरएलडी को छोड़कर बीजेपी के साथ चला गया तो मुस्लिमों को भी अपनी रवायत बदलनी होगी. साथ ही ओवैसी ने कहा कि दाढ़ी कटाकर सपा में कुछ लोग चले गए हैं. दलबदल की सियासत से काम नहीं चलेगा. उन्होंने मुसलमानों को एक बार AIMIM के साथ आने को कहा.

किसान आंदोलन के बहाने जाट-मुस्लिम एकता के प्रयास में जुटे राकेश टिकैत 2022 के चुनाव में बीजेपी को वोट के चोट से हराने का ऐलान कर चुके हैं. वहीं, मुस्लिम वोटों का बिखराव और मुजफ्फनगर दंगे के जख्म के हरे होने से बीजेपी की राह आसान बना सकता है. पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर में साल 2013 के सांप्रदायिक दंगों से जाट और मुस्लिम के बीच कड़वाहट और दोनों एक दूसरे के खिलाफ हो गए, जिसका बीजेपी को राजनीतिक रूप से फायदा मिला.
किसान आंदोलन के बहाने जाट और मुस्लिम एक साथ आए हैं और अब उन्हीं के वोट के सहारे 2022 के चुनाव में बीजेपी को चोट देने के नारे बुलंद किए जा रहे हैं. राकेश टिकैत इसी जाट-मुस्लिम समीकरण के जरिए पश्चिम यूपी में बीजेपी को सबक सिखाना चाहते हैं. उसी मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत ने किसान महापंचायत के दौरान हर-हर महादेव और अल्लाहु अकबर का नारा लगाया. इसका सीधा संकेत पश्चिम यूपी में जाट और मुस्लिम के बीच एकता का संदेश देना था. टिकैत की तमाम कोशिशें जाट-मुस्लिम को एक करने की हैं जबकि असदुद्दीन ओवैसी की नजर भी मुस्लिम वोटबैंक पर है. ऐसे में देखना है कि किसका पल्ला भारी रहता है?

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