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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर को उनके 94 वें जन्‍मदिन पर भावभीनी श्रद्धांजलि- अशोक बालियान

राजसत्ता पोस्ट

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर को उनके 94 वें जन्‍मदिन पर भावभीनी श्रद्धांजलि- अशोक बालियान

देश के आठवें प्रधानमंत्री व समाजवादी नेता स्वर्गीय चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के ग्राम इब्राहीमपुर में हुआ था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर के पद से हटने के बाद वह भोंडसी में अपने आश्रम में ही रहना पसंद करते थे। यह आश्रम गुडग़ांव जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर अरावली पहाड़ी की गोद में स्थित है।

पूर्व प्रधानमंत्री चद्रशेखर जी से हमारी मुलाक़ात उनके भोंडसी आश्रम में हुई थी। हमारी इस मुलाकात में किसान नेता श्री राकेश टिकैत व् श्री चंद्रशेखर के पूर्व पीए श्री सी वी गौतम के बेटे आशुतोष गौतम शामिल थे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत व पूर्व प्रधानमंत्री श्री चद्रशेखर के सम्बन्ध बहुत निकटतम थे।
कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री चंद्रशेखर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत के बुलावे पर सिसौली आकर किसानो को संबोधित किया था। उस समय हमे अपनी पुस्तक “भारत के किसान आन्दोलन में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की भूमिका” के लिए उनसे उनके विचार जानने का अवसर मिला था।


पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर ने इस वीरान जगह को तीन दशक पहले एक तरह से अध्यात्म व राजनीति के चिंतन मनन के लिए तपस्थली बना दिया था। कभी यहां से प्रदेश व देश की राजनीति को नियंत्रित किया जाता था। पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल से लेकर जयप्रकाश आंदोलन से जुड़े सभी नेता यहां आते थे।
एक सांसद के रूप में श्री चंद्रशेखर का वक्तव्य पक्ष और विपक्ष दोनों बेहद ध्यान से सुनते थे। श्री चंद्रशेखर अपनी आत्मा की आवाज़ पर प्रशंसा और आलोचना करते थे। श्री चंद्रशेखर को मुद्दों की राजनीति के लिए जाना जाता है, और अपने विचारों की अभिव्यक्ति लेखन द्वारा बहुत सशक्त तरीक़े से करते थे।


श्री चन्द्रशेखर का जीवन विभिन्नता में बीता था। वे एक अत्यंत पिछड़े किन्तु संघर्षशील इलाके के गरीब घर में जन्मे थे, किन्तु अपने संघर्ष, अध्यवसाय, लगन और ईमानदारी के बल पर भारत के सर्वोच्च स्थान पर पहुँचे थे। वे सन 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका यंग इंडियन के संस्थापक एवं संपादक भी रहे थे।
भारत के सन 1991 में आर्थिक हालात आज के ग्रीस की ही तरह थे। और भारत भी दिवालिया होने की कगार पर था, उस समय चंद्रशेखर केयरटेकर प्रधानमंत्री थे,उनकी अनुमति से भारत सरकार ने 47 टन सोना विदेश में गिरवी रखकर कर्ज चुकाया था। जब वह संसद में बोलते थे तब सभी उनकी बात सुनते थे। और वे सदन में धारा प्रवाह बोलते थे, उन्हें हर विषय पर बहुत अच्छा ज्ञान था।
श्री चंद्रशेखर सिंह जी का मानना था कि जीवन अपने हाथ में नहीं है, अपने हाथ में है कर्म है। जीवन लंबा चल सकता है और कल भी समाप्त हो सकता है। दोनों ही स्थितियों में मैं मानता हूं कि कोई व्यक्ति इतिहास का आखिरी व्यक्ति नहीं है। वही सारी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। श्री चंद्रशेखर सिंह जी का 8 जुलाई, 2007 को निधन हो गया था।
श्री चंद्रशेखर सिंह ने अपने पूरे जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा वे आज की राजनीति से परे थे। वे क्षेत्रवाद और परिवारवाद की राजनीति से कोसों दूर रहे। आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन राजनीति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।