Home राजनीति किशनगंज चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर

किशनगंज चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर

किशनगंज। 2019 के उपचुनाव में किशनगंज सीट पर जीत दर्ज कर ओवैसी की पार्टी का बिहार में खाता खुला था। एआइएमआइएम को इस बार कांग्रेस और भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। निर्धारित समय पर चुनाव शुरू हो गया है। वह  अपनी खोई हुई जमीन वापस लेने की छटपटाहट है तो एआइएमआइएम को कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। इन दोनों के बीच लगातार छह बार रनर रही भाजपा कमल खिलाने की जुगत में है। अल्पसंख्यक बहुल इस सीट पर कुल 20 प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन एआइएमआइएम प्रत्याशी कमरूल होदा के सामने कांग्रेस से इजहारुल हुसैन और भाजपा की स्वीटी सिंह हैं। कभी कांग्रेस तो कभी समाजवादियों के खाते में रही इस सीट पर ओवैसी के मजबूत दखल से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। 90 के दशक तक कांग्रेस और समाजवादियों के बीच टक्कर होती रही लेकिन 90 से अब तक लगातार छह दफे भाजपा दूसरे स्थान पर रही। इस दौरान कभी बेहद नजदीकी तो भी थोड़े अंतर से भाजपा जीत के करीब पहुंचने से चूक गई। ओवैसी के लगातार कैंप किए जाने और राहुल गांधी की सभा के बाद मुकाबला और भी कांटे की हो चुकी है। इस सीट पर वापसी कर कांग्रेस अपनी साख बचाना चाह रही है तो ओवैसी खुद को अल्पसंख्यकों का रहनुमा साबित करने की फिराक में हैं। खास बात यह है कि 2010 और 2015 में जीतकर कांग्रेस की झोली डालने वाले सांसद डॉ. जावेद आजाद को 2019 के चुनाव में मुंह की खानी पड़ी थी। 2019 में सांसद चुने गए डॉ. आजाद ने अपनी मां सईदा बानू को कांग्रेस की टिकट पर लड़ाया लेकिन परिवारवाद का विरोध इस कदर उभरा कि मतदाता ओवैसी की पार्टी की ओर रुख कर गए। वहीं इस दफे कांग्रेस ने सामान्य कार्यकर्ता को मैदान में उतारा है।

महानंदा और डोक नदी से घिरा है यह क्षेत्र

महानंदा और डोक नदी से घिरा इस विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। 2010 के परिसिमन के बाद किशनगंज नगर परिषद क्षेत्र समेत किशनगंज प्रखंड के चार और पोठिया प्रखंड का 22 पंचायत को शामिल किया गया। शहर के बीचोंबीच गुजरता फोरलेन सड़क, ओवरब्रिज और देश के अन्य हिस्सों से नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली रेलखंड थोड़ी खुशफहमी जरूर देती है। लेकिन शहरी इलाके से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव विकास की सच्चाई बयां करती नजर आ रही है। ग्रामीण इलाकों का कौन कहे यहां शहर में भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। बाढ़ और बरसात में स्थिति नारकीय हो जाता है। बरसात के दिनों में महानंदा और डोक नदी के उफान से लगभग एक लाख से अधिक की आबादी जिला मुख्यालय से कट जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल तो जगह-जगह खुले हैं लेकिन शिक्षकों का अभाव है। आवागमन अब भी बड़ी समस्या है। नाव और चचरी पुल के सहारे एक बड़ी आबादी बसर कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है।

किशनगंज विधानसभा में सर्वाधिक 20 प्रत्याशी हैं मैदान में

किशनगंज विधानसभा से सर्वाधिक 20 प्रत्याशी मैदान में हैं। जिनमें कमरुल होदा (एआइएमआइएम), इजहारुल हुसैन (कांग्रेस), स्वीटी सिंह (भाजपा), मु. मेहबूबुर रहमान (साेशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया), शंभु कुमार यादव (राष्ट्रीय उन्न्ति पार्टी), फिरोज आलम (ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक), प्रवेज आलम (राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल), शिवनाथ मल्लिक (शिव सेना), अनिल सिंह (भारतीय पार्टी), ताजमुद्दीन (भारत जागो जनता पार्टी), मु. जाहिद आलम (लोकतांत्रिक जनता दल), मकसूद आलम (विकासशील इंसान पार्टी) के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रामनाथ शर्मा, अब्दुल गफूर, तसीरउद्दीन, टेयला किस्कू, मोहन सिंह, इजेकल हांसदा और शिल्पी कुमारी शामिल हैं।

अब तक के विधायक

1952 – रावतमल अग्रवाल

1957 – अब्दुल हयात

1962 – मोहम्मद हुसैन आजाद

1967 – सुशीला कपूर

1969 – रफीक आलम

1972 – रफीक आलम

1977 – रफीक आलम

1980 – मोहम्मद मुश्ताक मुन्ना

1985 – मोहम्मद मुश्ताक मुन्ना

1990 – मोहम्मद मुश्ताक मुन्ना

1995 – रफीक आलम

2000 – मोहम्मद तस्लीमुद्दीन

2005 (फरवरी) – अख्तरुल ईमान

2005 (अक्टूबर) – अख्तरुल ईमान

2010 – डॉ. जावेद आजाद

2015 – डॉ. जावेद आजाद

2019 – कमरूल होदा

किशनगंज विधानसभा

मतदान केंद्र – 439

कुल मतदाता – 291023

महिला – 143699

पुरुष – 147307

बुजुर्ग – 5252

युवा – 74375

थर्ड जेंडर – 17