धरती से टकरा सकता है भीषण सौर तूफान  
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नई दिल्ली: एक गर्म और तेज तूफान की लहर मंगलवार और बुधवार के बीच धरती से टकरा सकता है। इसके चलते GPS सिस्टम, मोबाइल नेटवर्क और सैटेलाइट TV प्रभावित हो सकते हैं। इनकी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। सौर तूफान के चलते धरती के ऊत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर नॉर्दन और सदर्न लाइट्स की मात्रा और फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है।

3 जुलाई को सूरज के दक्षिणी हिस्से में एक बड़ा विस्फोट देखा गया। इसकी वजह से सोलर फ्लेयर्स यानी सौर किरणें तेजी से धरती की ओर बढ़ रही हैं। ये मंगलवार और बुधवार के बीच यानी 13 जुलाई को किसी भी समय धरती पर कुछ मिनटों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। 

स्पेशवैदर डॉट कॉम के मुताबिक, सूरज की तरफ आने वाले इस तूफान से धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर असर पड़ सकता है, जो लोग उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव के आसपास रहते हैं, उन्हें रात में आसमान में खूबसूरत औरोआ देखने को मिल सकता है, लेकिन यह खूबसूरती अपने साथ कई तरह की दिक्कतें भी लेकर आ रही है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, यह सौर तूफान धरती की तरफ 16 लाख किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आ रहा है, जोकि कुछ समय में और ज्यादा तेज हो जाएगा। जैसे ही यह तूफान धरती के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करेगा, इसकी वजह से सैटेलाइट सिग्नल बाधित होंगे, जिससे जीपीएस, टीवी, मोबाइल नेटवर्क में दिक्कत आ सकती है।

सौर तूफान की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो सकता है, जिसका सीधा असर अलग-अलग देशों द्वारा भेजे गए सैटेलाइट्स पर पड़ेगा। इसकी वजह से जीपीएस के सहारे चलने वाले विमानों, जहाजों, मोबाइल फोन और सैटेलाइट टीवी आदि की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। ये भी हो सकता है कि कुछ देशों में बिजली की सप्लाई बाधित हो जाए और लोगों को अंधेरे का सामना करना पड़े। 

सौर तूफान की वजह से धरती पर एक और तूफान का खतरा पैदा होगा, जिसे जियोमैग्नेटिक तूफान कहते हैं। जब सूरज से आने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स धरती की चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तब जियोमैग्नेटिक तूफान आता है। इसकी वजह से धरती के चुंबकीय क्षेत्र में कुछ देर के लिए बाधा उत्पन्न होती है, जिससे लैटीट्यूट और लॉन्गीट्यूड समझने में दिक्कत होती है। इससे जीपीएस काम करना बंद कर देता है।

यह सौर तूफान जब 3 जुलाई को सूरज से शुरू हुआ था, तब अमेरिका के कुछ हिस्सों में हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन में बाधा आई थी, लेकिन यह कुछ सेकेंड्स के लिए ही थी क्योंकि सूरज से आई लहर की वजह से एक्स-रे में बदलाव हुआ और उनकी वजह से रेडियो सिग्नल बाधित हो गए।

पहले भी आ चुके भयावह सौर तूफानधरती पर सौर तूफान का सबसे भयावह रूप मार्च, 1989 में देखने को मिला था, तब सौर तूफान की वजह से कनाडा के हाइड्रो-क्यूबेक इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन सिस्टम 9 घंटे के लिए ब्लैक आउट हो गया था। इसके बाद वर्ष 1991 में सौर तूफान की वजह से लगभग आधे अमेरिका में बिजली गुल हो गई थी, लेकिन यह सबसे बड़े तूफान नहीं थे। 

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