Home LyfeStyle स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मस्तिक निर्माण होता है

स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मस्तिक निर्माण होता है

जीवन संघर्षमय है यह बात हम सभी को पता है। तभी तो हम हर दिन जीवन को एक कुआं मान उसमें से सुख खींचते रहते हैं। जिसमें से कभी-कभी जल के साथ अनचाही चीज भी आ जाती है जिसे हम दुख कहते हैं।
जीवन की कठोरता को हम तब अधिक महसूस करते हैं जब हमारे जीवन में अचानक ही विपत्ति आ जाती है। इस वर्ष कोरोनावायरस के कारण पूरा विश्व संकट में घिरा हुआ है। संकट की घड़ी में ही परिवार में जमा की गई राशि काम आती है। स्वस्थ रहने के लिए शरीर पर की गयी मेहनत स्वस्थ शरीर के साथ जूझने की क्षमता बढ़ाती है।
कहावत मशहूर है “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है” स्वस्थ मस्तिष्क ही हमें संकट की घड़ी में धैर्य बनाए रखने में मदद करता है। लगभग 7 महीनों से हम सभी भारतवासी कोरोना संक्रमण से जूझते आ रहे हैं। अब जबकि कोरोना के मरीजों की संख्या लगभग 70 लाख पार हो रही है तब लोगों का कोरोनावायरस से भय धीरे धीरे कम हो रहा है! कोरोना की संख्या में बढ़ोतरी सोने चांदी की कीमतों जैसे दिन प्रतिदिन बढ़ रही है और कोरोना का डर शेयर मार्केट की तरह दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है!
आखिर समाज के लोग कब तक घरों में बंद रहेंगे? अपनी अपनी जमा पूंजी घर बैठे खाते रहेंगे? सोचने वाली बात है कि लोगों का भय धीरे धीरे कम हो रहा है या फिर उन्हें लगता है कि कोरोना से मरने से बेहतर है कि काम करके ही मरा जाए! ऐसी सोच बढ़ रही है फिर भी हमें कोरोना से बचाव जरूरी है।

मास्क पहनना है जरूरी- 

मगर जिस प्रकार सड़कों और बाजारों में बेतहाशा भीड़ देखने को मिल रही है यह बहुत ही चिंताजनक है। बहुत जरूरी कार्य के लिए घर से निकलना तो एक मजबूरी है जिसका समर्थन किया जा सकता है। मगर बेवजह मौज मस्ती के लिए इस कोरोना संक्रमण काल में भी घुमंतू लोगों का क्या किया जाए!
पुलिस प्रशासन भी अब ज्यादा रोक-टोक नहीं करती है। अधिकांश जगह बिना मास्क लोगों को आसानी से देखा जा सकता है। मास्क लगाने के लिए अगर टोक दो तब ऐसा मुंह बनाते हैं जैसे कड़वी दवा पिला दी गई हो!
उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं है कि उनके बिना मास्क, बेवजह घूमने से वो स्वयं को खतरे में डाल रहे हैं और उनके आसपास गुजरने वाले लोगों को भी खतरे में डाल रहे हैं! कम से कम भीड़-भाड़ इलाके में लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य होना चाहिए।
हम भारतीय लोगों की प्रतिरोधक क्षमता भी हमें अति आशावादी बना देती है। गाहे-बगाहे हम सभी अपने खाने में हल्दी, साग-सब्जी का प्रयोग करते ही हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे मौसम भी हमें हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
दीपावाली के आसपास प्रदूषण लेवल ना जाने कहां से बढ़ जाता है! जिस कारण सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है। हम सभी नागरिकों की यह जिम्मेदारी है कि हम स्वयं मास्क पहने और घर से बेवजह बाहर ना निकले और बिना मास्क पहने घूमते लोगों को हाथ जोड़कर मास्क पहनने का अनुरोध करें…

संगीता कुमारी (लेखिका/कवयित्री)

नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, टाउनशिप