“एंटीना” बन्द हो जाएगा दूरदर्शन से जुड़ा एक अध्याय

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मैंने सुना है 22 अक्तूबर से दूरदर्शन अपना एंटीना वाला प्रसारण बंद कर रहा है , अपने जमाने में शुरू हुआ और खत्म होता हुआ एक अध्याय का अंत देख रहा हूं!

स्वतंत्र लेखक एम नफीस रशीद की कलम से

जब से सुना है कुछ बातें याद आ रही है टीपू सुल्तान, अलिफ लैला, महाभारत, रामायण, फटीचर, देख भाई देख, हम हैं कमाल के, चित्रहार जैसे अनेक प्रसिद्ध कार्यक्रम हमने बचपन से ले कर बड़े होने तक देखे हैं,

साथ में देखने वालों के भी नाम याद हैं जो हमारे साथ बचपन में इस तरह के प्रोग्राम देखते थे मेरे चाचा की लड़की फिरोजा जो कि मुझसे कुछ साल बड़ी थी आज इस दुनिया में नहीं है फिरदोस, फिरोज, गुलशाना, हुस्नारा, जमीर, जहांगीर, सलीम, हम सब एक ही मोहल्ले में अनगिनत बच्चे हुआ करते थे और बड़े चाव के साथ बुजुर्गों की गालियां खाते हुए यह सभी प्रोग्राम देखा करते थे

आज सब बड़े हो चुके हैं सुना 22 अक्टूबर को एंटीना के द्वारा प्रसारण बंद कर दिया जाएगा हल्के आज इसकी जरूरत भी नहीं है पर हां एक दुख्द एहसास हो रहा है क्योंकि यादें बचपन की है साथ ही साथ यह भी जिक्र करना जरूरी है कभी हमारे शहर हसनपुर में हमारे ही बचपन में टीवी नहीं थे बड़ी मुश्किल में पड़ोसियों के घर देखते हुए अपने घर में टीवी हुआ था मेरे चाचा याकूब साहब ने टॉकिंग लॉटरी, के माध्यम से टीवी हासिल किया था खरीदना भी आसान नहीं था शायद क्योंकि मुझे याद है एक रुपए में बहुत सारी चीजें आ जाया करती थी और 10 रुपए का नोट हम जैसे बच्चों को खुला कराना भारी पड़ जाया करता था आज जमाना बदल रहा है और जो चीज हमारे सामने शुरू हुई उसका अंत भी देख रहे हैं,

एक जमाना था ब्लैक एंड व्हाइट टीवी, एंटीना का छत पर खड़े होकर एंटीना घुमाना और नीचे से आवाज का आना नहीं आया,

आज वाईफाई है

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