Home उत्तराखंड 3.11 लाख श्रद्धालुओं ने किए इस सीजन चारों धाम के दर्शन

3.11 लाख श्रद्धालुओं ने किए इस सीजन चारों धाम के दर्शन

गोपेश्वर(चमोली)। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही हिमालय की चारधाम यात्र ने भी विराम ले लिया। कोरोना संक्रमण के चलते हालांकि इस बार यात्रा विलंब से शुरू हुई, लेकिन बरसात के बाद उसने काफी गति पकड़ ली। मध्य अक्टूबर के बाद तो बदरी-केदार धाम में तीन से चार हजार यात्री रोजाना पहुंचने लगे थे। यही वजह रही कि कपाट बंद होने तक चारों धाम में यात्रियों की संख्या तीन लाख 11 हजार 549 पहुंच गई।

गुरुवार को बदरीनाथ धाम के साथ ही भविष्य बदरी धाम और द्वितीय केदार मध्यमेश्वर धाम के कपाट भी बंद हो गए। इससे पूर्व, अन्नकूट पर्व पर 15 नवंबर को गंगोत्री धाम और भैयादूज पर्व पर 16 नवंबर को यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। इसके अलावा गत 17 अक्टूबर को चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम और गत चार नवंबर को तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद हो चुके थे। जबकि, हिमालय के पांचवें धाम कहे जाने वाले हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के साथ ही लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी बीते दस अक्टूबर को बंद कर दिए गए थे।

बदरीनाथ

बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी की अगुआई में आज भगवान नारायण के बालसखा उद्धवजी और देवताओं के खजांची कुबेरजी की डोली और आदि शंकराचार्य की गद्दी यात्र पांडुकेश्वर स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर के लिए रवाना होगी। उद्धवजी व कुबेरजी शीतकाल में यहीं निवास करते हैं। जबकि, रावल, धर्माधिकारी, वेदपाठी व श्रद्धालु आदि शंकराचार्य की गद्दी के साथ 21 नवंबर को जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर पहुंचेंगे। शीतकाल में यहीं गद्दी की पूजा होती है।

भविष्य बदरी और वंशीनारायण मंदिर के कपाट भी बंद

सुभाईं गांव स्थित भविष्य बदरी धाम के कपाट भी बदरीनाथ धाम के साथ दोपहर 3.35 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर के पुजारी हनुमान प्रसाद डिमरी ने बताया कि परंपरा के अनुसार भविष्य बदरी धाम के कपाट बदरीनाथ धाम के साथ ही खोले और बंद किए जाते हैं।उधर, भगवान वंशीनारायण मंदिर के कपाट भी दोपहर बाद 3.35 बजे बंद किए गए।

मध्यमेश्वर के कपाट बंद

पंचकेदारों में शामिल द्वितीय केदार भगवान मध्यमेश्वर धाम के कपाट भी सुबह सात बजे शीतकाल के लिए बंद हो गए। कपाट बंदी की प्रक्रिया सुबह चार बजे विशेष पूजाओं के साथ शुरू हुई। मुख्य पुजारी टी.गंगाधर लिंग ने स्वयंभू शिवलिंग को शीतकाल के लिए समाधि दी। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी, वेदपाठी, पुजारी उपस्थित थे।