समय तो बदल जाएगा पर इस अव्यवस्था का क्या ?

समय तो बदल जाएगा पर इस अव्यवस्था का क्या ?

राजसत्ता पोस्ट

समय तो बदल जाएगा पर इस अव्यवस्था का क्या ?

हम, आप और सभी लोग अब आकड़ें बन कर रह गये है जहाँ सिर्फ संक्रमण की संख्या, ठीक होने वालों की संख्या और काल के गाल मे समा जाने वालों की संख्या सामने आ रही है जबकि जमीनी हकीकत यह है की देश मे कोहराम मचा हुआ है चारों तरफ लोगों के चेहरे पर अनिश्चितता और डर को महसूस किया जा सकता है | परिस्थिति ने विगत दिनों मे ऐसी करवट ली है कि दिग्गज से दिग्गज लोग भी इलाज की गुहार लगाते देखे जा रहें है ऐसे मे आम आदमी की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है | स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का बुरा हाल हो गया है | अस्पताल मे वेंटीलेटर और ऑक्सिजन की व्यापक कमी है | संबंधित सेवाओं की कालाबाजारी अपने चरम पर है | ऐसे मे इलाज के लिए तड़प रहे लोगों की जहाँ एक बड़ी समस्या है वही नियमित रोजगार के द्वारा जीवन यापन करने वाले लोगों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाने की समस्या अलग खड़ी हो गयी है | जिन लोगों को जीते जी इलाज नहीं मिला उन लोगों को मरने के बाद घटों अंतिम क्रिया के लिए इंतेजर करना पड़ रहा है | पर राजनैतिक चश्मे से आप देखेगे तो अभी भी सब कुछ सामान्य दिखेगा | जबकि अनेकों लोग इस अव्यवस्था का शिकार हो चूकें है और अपने प्रियजनों को खोने के गहरे दुःख मे है |

प्रत्येक समय की एक अच्छी बात होती है की वह व्यतीत हो जाता है यह समय भी एक न एक दिन व्यतीत हो जाएगा कहने को रह जाएगी तो सरकारी व्यवस्था की अव्यवस्था | जहाँ लोगों के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण बड़ी बड़ी चुनावी रैलियाँ है | अभी कुछ माह पूर्व ही देश के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना फ्री नेशन करने की बात कर रहें थे | टीकाकरण का गुरु देश को माना जा रहा था | कुछ लोगों का कहना था की देश मे युवा ज्यादा है ऐसे मे कोरोना का प्रभाव नहीं पड़ेगा | जब विश्व मे कई देश त्राहि-त्राहि कर रहें थे तो हम बिना परिस्थिति का आकलन किए लापरवाही कर रहे थे | जिम्मेदारी आम जनता की भी है पर सर्व प्रथम लापरवाही सरकार की है जिसने इतने बड़े संकट से लड़ने के लिए पिछले एक वर्ष से अधिक समय मे कोई ठोस उपाय नहीं किए | दावे बड़े-बड़े है पर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता की कोई भी हॉस्पिटल रातों – रात नहीं बनाया जा सकता | सिर्फ बेड लग जाने से आवश्यकता पूरी नही हो सकती | अभी यह परिस्थिति तब है जबकि संक्रमण की मौजूदगी गावों तक बड़े पैमाने पर नहीं पहुँची है | नासिक के जाकिर हुसैन अस्पताल मे ऑक्सिजन टैंक लीक होने से मरने वाले 22 लोगों की संख्या बड़ी लापरवाही और डर को प्रदर्शित करता है | कुछ जगह ऑक्सिजन सिलेंडर की लूट भी कई प्रश्न खड़ा कर रहा है | देश मे अब तक कोरोना वायरस से मरने वाले लोगो की संख्या 1.80 लाख से अधिक हो चुकी है | आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है ?

वर्तमान परिस्थिति देखकर ऐसा लगता है की सब कुछ भगवान भरोसे ही चल रहा है जहाँ जनता के पास कोई विकल्प नहीं है | हर उम्र के हर तबके के लोगों का काल के गाल मे इलाज के अभाव मे समा जाना असहनीय पीड़ा का एहसास सभी को करा रहा है | सरकार द्वारा 18 वर्ष के ऊपर के लोगों को 1 मई 2021 से टीकाकरण करने की घोषणा भी संदेह के घेरे मे है क्योंकि पहले से निर्धारित 25 करोड़ लोगों का टीकाकरण अभी तक नहीं हुआ | अब 70 करोड़ आबादी को इसमे और जोड़ दिया गया है | तात्कालिक रूप से आम जन को इलाज चाहिए जिसका प्रबंध करना अत्यंत जरूरी है पर सरकारों के रवैये से लगता है की परिस्थिति उनके नियंत्रण से बाहर हो चुकी है | विश्व के कई देशों मे जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने तबाही मचाई थी तो हमे लगा था की हम इससे अछूते रहेगे पर आज की परिस्थिति सब बयाँ कर रही है | अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने देश के नागरिकों के लिए भारत आने के लिए चेतावनी जारी कर दिया है | भविष्य मे समस्या बड़ी और असहनीय हो सकती है | आम जन के साथ साथ राजनीति, ब्यूरोक्रेसी की भी कड़ी अग्नि परीक्षा का समय चल रहा है | सितंबर 2020 मे जहाँ संक्रमण की सबसे अधिक संख्या लगभग 1 लाख के पास थी आज वही संख्या बढ़ करके लगभग 3 लाख के करीब है | संक्रमण की संख्या मे अमेरिका के बाद भारत दूसरे क्रम पर है जबकि संक्रमण से मृत्यु के क्रम मे अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको के पश्चात चौथे क्रम पर है | स्थिति और भयावह हो सकती है यदि सरकारें इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया | सारे उपायों को अपनाने के पश्चात भी कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है पर यदि इलाज के अभाव मे किसी की मृत्यु होती है तो यह सीधे सिस्टम पर प्रश्न खड़ा करता है |

देश मे अब कोरोना की नयी किस्म पायी गयी है चार सूबे मे मौजूद होने की आशंका भी है | अच्छी बात यह है की को-वैक्सीन के दो डोज़ लेने वालों मे से 0.04% लोग ही कोरोना संक्रमित हुये है और अब तक 12.71 करोड़ से अधिक लोगों को टीका देश मे लग चुका है ऐसे मे टीकाकरण की गति तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता है | इसके साथ साथ आगामी समस्त चुनाव तुरंत टालें जाए, कोरोना टेस्ट अत्यधिक कराएं जाए, सामान्य लक्षण मिलने पर लोग स्वयं तुरंत जाँच कराएं, छोटे-छोटे स्तर पर लॉक-डाउन लगाया जाए | साथ ही केंद्र सरकार आम आदमी के जीवन की आर्थिक समस्या को समझते हुये मदद के लिए आगे आए जिससे दोहरी मार से आम आदमी बच सकें | आजादी के दशकों पश्चात आज भी हम वही खड़े है जहाँ कभी प्लेग जैसी बीमारी मे खड़े थे | सरकारों को चाहिए की शमशान घाटो के चारो तरफ टीन की दीवारों से ढकने के बजाय समय और संसाधन लोगों के इलाज मे व्यय करें, जिससे मरने वाले लोगों के परिवार को कम से कम इलाज न कराने का अफसोस तो न रहे |

डॉ. अजय कुमार मिश्रा लखनऊ
drajaykrmishra@gmail.com

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