मजबूत होते संबंध: भारत, आस्ट्रेलिया के बीच पहली टू प्लस टू वार्ता आज, दोनों देश रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत
मजबूत होते संबंध: भारत, आस्ट्रेलिया के बीच पहली टू प्लस टू वार्ता आज, दोनों देश रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत

नई दिल्ली। भारत की आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के साथ शुक्रवार को शुरू हुई टू प्लस टू वार्ता आज भी जारी रहेगी। इसमें भारत की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भाग ले रहे हैं। यह वार्ता 12 सितंबर तक चलेगी। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच यह पहली टू प्लस टू वार्ता है। इसके बारे में 4 जून, 2020 को दोनों देशों की बैठक में फैसला किया गया था। इसमें दोनों देशों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणीतिक साझेदारी के तहत रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूती देने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इसके अलावा आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री शाम करीब साढ़े चार बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात करेंगे। पायने सुबह 10:30 बजे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण करने के बाद जयशंकर से हैदराबाद हाउस में मिलेंगी। इसके बाद वह दोपहर 3 बजे जवाहरलाल नेहरू भवन में एक प्रेस कान्फ्रेंस में भी शामिल होंगी।

आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मैरिस पायने ने शुक्रवार को कहा कि हाल के दिनों में चीन ने रिश्तों में चुनौतियां पेश की हैं और उसके कुछ कामों ने उनके देश के राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला है। आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीसरे हिंद-प्रशांत व्याख्यान में पायने से जब आस्ट्रेलिया की चीन नीति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हाल के दिनों में हमने देखा है कि चीन ने निश्चित रूप से रिश्तों में चुनौतियां पेश की हैं। क्योंकि हमने उसके कुछ कामों को आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा माना है। ऐसे कई काम हैं जिनको कैनबरा में राजनयिकों ने सार्वजनिक रूप से गिनाया है। उन्हें कैनबरा में चीनी दूतावास द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराया गया था।'

उन्होंने आगे कहा, 'जो देश स्वतंत्र मीडिया का सम्मान करते हैं वे उस पर प्रतिबंध के लिए सहमत नहीं होंगे। जो देश थिंक टैंक और विश्वविद्यालयों जैसे संस्थानों की आजादी का सम्मान करते हैं, वे उन पर बंदिशें लगाने पर सहमत नहीं होंगे। जो देश साइबर स्पेस और अन्य क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा की रक्षा करते हैं, वे ऐसा करने पर सहमत नहीं होंगे। और जब हम कहते हैं कि हमारे राष्ट्रीय हित ऐसे कामों से आगे नहीं बढ़ते तो हम हमेशा ऐसा कहेंगे।'

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