गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन सिंह मलिक नहीं रहे
गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन सिंह मलिक नहीं रहे

गठवाला खाप चौधरी बाबा हरिकिशन सिंह मलिक का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अपने गावं लिसाढ़ स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली है। गठवाला मलिकों के हरियाणा के जनपद रोहतक में व् जनपद सोनीपत में 42 गांव, जनपद जीन्द में 12 गांव, जनपद हिसार में 7 गांव है उततर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में 52 गांव, मेरठ में 3 गांव हैं। उत्तरप्रदेश अन्य जनपदों में भी मलिकों के कुछ गांव हैं। 

    गठवाला गोत्र के लोगों हरियाणा में गोहाना के पास अपने पूर्वज हुलराम के स्थान पर हुलोणा ग्राम बसाया था। जिला मुजफ्फरनगर में गठ्वाला खाप रोहतक-सोनीपत में निवास करने वाली गठ्वाला खाप के बाद सर्वाधिक महत्त्व रखती है। इस गोत्र का हरियाणा के मुखिया दादा बलजीत सिंह मलिक है और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में बसी गठ्वाला खाप के मुखिया चौधरी हरिकिशन सिंह  मलिक थे। इनके बाद परम्परा के अनुसार इनके पुत्र चौधरी राजेन्द्र मलिक को इस खाप के मुखिया की पगड़ी बाँधी जायेगी।  
    पुराने समय में समाज में सामाजिक व्यवस्थाओं को बनाये रखने के लिए परिवार के मुखिया को सर्वोच्च न्यायाधीश के रूप में स्वीकार किया था और आगे चलकर समाज जब बढ़ गया, तब उस समहू में एक परंपरागत चौधरी बनने की परम्परा की शुरुआत हुई, जिसको खाप कहा जाने लगा था।  इस प्रकार खाप द्वारा सामाजिक व्यवस्था चलाने  का चलन शुरू हुआ था। 
    भारत में मान्यताओं के अनुसार सप्त ऋषि के नामों के आधार पर ही चारों वर्णों के लोगों के गोत्र माने जाते हैं। गोत्रों के आधार पर भी वंशों का विकास हुआ। सामान्य रूप से गोत्र का मतलब कुल अथवा वंश परंपरा से है। जाटों में गोत्र पितृवंशीय होता है। एक गोत्र और वंश के व्यक्ति आपस में भाई-बहिन होते है और उनके मध्य विवाह सम्बन्ध वर्जित होता है।  लेकिन कुछ खापे अनावश्यक निर्णयों से अपनी मान्यता खोटी जा रही हैं।  
    गठ्वाला खाप ने अपने इतिहास में अनेको सामाजिक बुराइयों के लिए संघर्ष किया। हरियाणा में  कलानौर के नवाब ने अपने अधीन हिन्दू जनता पर अत्याचार आरम्भ कर दिये थे, इसके विरुद्ध गठवाला मलिकों के नेतृत्व में चारों ओर की जाट खापों ने मिलकर नवाब पर आक्रमण करके उसका वध कर दिया था। 
    खाप व्यवस्था को नया रूप देने का श्रेय बालियान खाप के चौधरी स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को  जाता है, वे गठ्वाला खाप के बाबा चौधरी हरिकिसन मलिक का बहुत आदर करते थे। चौधरी टिकैत के किसान आन्दोलन के उस दौर में अधिकतर किसान पंचायतों की अध्यक्षता चौधरी हरिकिसन मलिक करते थे। गठ्वाला खाप के बाबा चौधरी हरिकिसन मलिक के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
बालियान खाप के चौधरी  और  भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष  नरेश टिकैत ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा चौधरी हरिकिशन मलिक जी का निधन  दुखद है ।चौधरी हरिकिशन मलिक किसान आंदोलन के हमेशा पक्षधर रहे। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति है। चौधरी साहब खाप व्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ थे ।
उनके निधन से मुझे व्यक्तिगत हानि है, नियति के आगे किसी का बस नहीं चलता यही सोच कर मन को समझाना पड़ता है। मेरी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि
भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी dharmendra malik ने शोक व्यक्त करते हुए कहा खाप के बाबा चौधरी हरिकिशन मलिक का निधन केवल मलिक गोत्र के लिए ही नहीं सर्व समाज के लिए अपूरणीय क्षति है ।चौधरी हरिकिशन मलिक जी का किसान आंदोलन में सहयोग को भुलाया नहीं जा सकता। खाप व्यवस्था को मजबूत करने और किसान आंदोलन को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अतुलनीय योगदान है ।
चौधरी चौधरी टिकैत साहब के समय किसान आंदोलन में अधिकतर किसान पंचायतों की अध्यक्षता चौधरी हरिकिशन मलिक ने ही की थी ।

Share this story